अहरौला के माहुल बाजार में गुरुवार की सुबह चाय की दूकान पर बैठे शिक्षामित्र लाल बहादुर यादव (48) की हृदयाघात से मौत हो गई। दूकान पर बैठे लोगों की मानें तो सहायक शिक्षक बनने का आदेश रद्द होने से वे निराश थे। परिवार पर आए आजीविका के संकट की बाबत ही वे लोगों से बात कर रहे थे तभी अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ गया।
निजी चिकित्सक के यहां ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। साथी की मौत की सूचना पर अस्पताल में काफी संख्या में शिक्षामित्र जुट गए। ऐहतियात के तौर पर वहां पुलिस भी तैनात कर दी गई थी। पवई के नाटी गांव निवासी और तीन भाइयों में सबसे बड़े लालबहादुर यादव अपने छोटे भाई मानबहादुर के साथ रहते थे। उन्हें पांच पुत्र और एक पुत्री है, लेकिन अभी किसी की भी शादी नहीं हुई है।
पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधे पर थी। शिक्षामित्र से अध्यापक बनने के बाद उनके परिवार में रोजी-रोटी का संकट खत्म हो गया था, लेकिन इधर हाईकोर्ट के आदेश पर सहायक शिक्षकों का समायोजन रद्द होने पर वे काफी दुखी थे। उन्हें परिवार की आजीविका की चिंता सता रही थी। गुरुवार की सुबह जब लालबहादुर माहुल बाजार गए तो वहां उनकी मुलाकात ग्राम प्रधान और उनके चचेरे भाई राजबहादुर यादव से हुई।
इस दौरान बातचीत में वे नौकरी जाने पर चिंता जता रहे थे। इसके बाद चाय की दुकान पर अखबार पढ़ने के दौरान वे अचानक बेंच से नीचे गिर गए। वहां मौजूद लोग उन्हें लेकर तत्काल एक निजी चिकित्सक के यहां गए। वहां डाक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पोस्टमार्टम के वक्त काफी संख्या में शिक्षामित्र संगठन के लोग जिला अस्पताल पहुंच गए। एहतियात के तौर पर अस्पताल के बाहर फोर्स भी तैनात कर दी गई थी।