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दस का सिक्का न लेने पर होगी जेल

Fri, 04 Nov 2016 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
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10 के सिक्के
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दस रुपये के सिक्के के प्रचलन को लेकर फैैला भ्रम शुक्रवार को जिलाधिकारी सुहास एलवाई की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई बैंक अधिकारियों और व्यापार मंडल के पदाधिकारियों की बैठक में दूर हो गया। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि दस रुपये का सिक्का नहीं लेने वालों अधिकतम सात वर्ष का कारावास और अर्थदंड की सजा दी जा सकती है। जिलाधिकारी ने बैंक अधिकारियों और व्यापारियों को आवश्यक निर्देश दिया।
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जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने कहा कि टंकण अधिनियम 2011 के तहत सिक्कों का प्रचलन अधिकृत मिंटो के जरिये भारत सरकार की ओर से किया जाता है। जबकि नोट का मुद्रण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से किया जाता है। 10 रुपये के सिक्के दो अलग-अलग धातु के इस्तेमाल से बनाए जाते हैं। असली दस रुपये के सिक्कों में राष्ट्रीय प्रतीक (चार मुंह वाला सिंह) की ढलाई स्पष्ट होती है।

कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें। 10 रुपये के सिक्के प्रचलन में हैं। इसे लेने से जो भी व्यक्ति या व्यापारी मना करेगा तो उसे दोषी मानते हुए सात वर्ष जेल और जुर्माना दिया जा सकता है। भारतीय दंड संहिता के अनुभाग 124 अ के तहत भी प्रचलित मुद्रा को स्वीकार न करने पर दंड का प्रावधान है।
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सरकार सिक्कों की गारंटी देती है। बैंक में सिक्के लिए जा रहे हैं और दिए भी जा रहे हैं। उन्होंने व्यापारमंडल के प्रतिनिधियों से कहा कि व्यापारियों की बैठक कर भ्रांतियों को दूर करें। क्षेत्र प्रमुख यूनियन बैंक शैलेश कुमार सिंह ने बताया कि किसी भी बैंक में एक बार में अधिकतम 1000 रुपये तक के सिक्के जमा कर सकते हैं। मौके पर एडीएम प्रशासन पीपी सिंह, एलडीएम मनोज कुमार, ग्रामीण बैंक के क्षेत्र प्रमुख बीडी शुक्ला, विजिलेंस विभाग के अमृत पाल, स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक, अध्यक्ष व्यापार मंडल संत प्रसाद अग्रवाल, व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष पद्माकर लाल वर्मा, गौतम सेठ मौजूद थे।
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