आजमगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय विद्यालयों को संवारने के लिए चलाई गई कायाकल्प योजना का दावा भले ही विभाग के रिकॉर्ड में शत-प्रतिशत पूरा दिखाया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। योजना के तहत विद्यालयों में 19 पैरामीटर पर कार्य कराने थे। बीते महीने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएसए की ओर से यह घोषणा की गई कि जनपद के सभी विद्यालयों में कायाकल्प योजना के कार्य पूरे कर लिए गए हैं।
जिले में 2706 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष खड़ा करने के लिए सरकार की तरफ से ऑपरेशन कायाकल्प योजना शुरू की गई है। पहले इसके लिए 14 पैरामीटर निर्धारित किए गए थे, लेकिन बाद में पांच पैरामीटर को बढ़ा दिया गया था, जिसके बाद 19 हो गए थे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार पाठक ने बताया कि जिले में 100 प्रतिशत विद्यालयों में 19 पैरामीटर पर काम हो चुका है। कुछ विद्यालयों में बाकी होगा तो उसे भी पूरा करा दिया जाएगा। शासन को शत प्रतिशत कार्य पूर्ण होने की सूचना पर सवाल किया गया तो वह कुछ उचित जवाब नहीं दे सके।
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इन बिंदुओं पर होना था कार्य :
शुद्ध सुरक्षित पेयजल, विद्यालय में नल-जल की आपूर्ति, बालक इज्जत घर, बालिका इज्जत घर, बालक यूरिनल, बालिका यूरिनल, यूरिनल में जलापूर्ति, इज्जतघर का टाइलीकरण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, आधुनिक रसोईघर, कक्षा की फर्श पर टाइलीकरण, श्यामपट विद्यालय की रंगाई-पुताई, दिव्यांग सुलभ रैंप व रेलिंग, कक्षा कक्ष में वायरिंग व विद्युत उपकरण, विद्यालय का विद्युत संयोजन, बच्चों के लिए डेस्क व बेंच, विद्यालय की चाहरदीवारी।
केस-1 : पानी की टंकी व पाइपलाइन न होने से परेशानी
सरायमीर। प्राथमिक विद्यालय प्रथम सरायमीर में अभी तक बेंच और डैक्स नहीं पहुंचे हैं। बच्चे फर्श या टाट पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। शौचालय के ऊपर पानी की टंकी नहीं लगी है और पानी सप्लाई भी नहीं हो रही है। बच्चों को पानी पीने के लिए टंकी में कोई व्यवस्था नहीं है और पाइपलाइन भी अभी तक नहीं लगी है। बच्चे हैंडपंप से अपनी प्यास बुझाते हैं। प्रधानाध्यापक नीता कुमारी ने बताया कि इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
केस-2 : फर्नीचर और शौचालय की समस्याएं
पवई। इंग्लिश मीडियम प्राइमरी विद्यालय जल्दीपुर में 115 छात्र पंजीकृत हैं। स्कूल में तीन पुरुष और दो महिला शिक्षिकाओं की नियुक्ति की गई है। हालांकि, फर्नीचर की कमी के कारण कक्षाएं फर्श पर ही चलती हैं। छात्रों को टाट पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती है। तीन कमरों को छोड़कर बाकी कमरों में टाइल नहीं लगी हैं और बरसात के मौसम में फर्श हमेशा गीला रहता है। शौचालय तो बनवाया गया है, लेकिन दरवाजे टूटे हैं और टंकी न होने के कारण छात्र-छात्राएं बाहर शौच करते हैं। दिव्यांग शौचालय का भी अभाव है। पानी के नल टूटे हैं, जिससे पानी के लिए हैंडपंप का सहारा लेना पड़ता है।
केस-3 : बाउंड्रीवाॅल की व्यवस्था नहीं
बरदह। उच्च प्राथमिक विद्यालय दुबरा में बाउंड्रीवाल टूट चुकी है और कांटेदार तार गिर पड़े हैं, जिससे बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में है। जबकि विभाग का दावा है कि बाउंड्रीवाॅल बनाई गई है। ऐसे में साफ है कि कायाकल्प में अभी भी काम अधूरा है।
केस-4 : शौचालय गंदा, दरवाजा टूटा, चारदीवारी भी टूटी हुई
बूढ़नपुर। शिक्षा क्षेत्र कोयलसा के प्राथमिक विद्यालय चेक रजई में बच्चों को बैठने के लिए टाट पट्टी की व्यवस्था की गई है। शौचालय की सफाई अच्छी नहीं है और उसका दरवाजा टूटा है। विद्यालय में विद्युतीकरण है, लेकिन चहारदीवारी एक तरफ से टूटी है।