विगत तीन वर्षों में औसत से कम हुई बारिश से भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे चला गया है। जिसके कारण लोगों के हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। वहुत से लोग दूसरी बोरिंग करा रहे हैं तो बहुत से लोग बोरिंग के लेबल को नीचे करने में जुटे हैं। वहीं जिले में जल संचयन की योजना फ्लाप हो गई है। तालाब सूख चुके हैं तो अमृत योजना के तहत वाटर हार्वेस्टिंग के लिए आया 56 लाख रुपये अभी तक उसके खाते की शोभा बढ़ा रहा है।
जल संचयन के लिए सरकार ने तालाबों की खुदाई के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए लेकिन जिले के तालाबों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। जनपद के लगभग 90 प्रतिशत तालाबों में इस समय पानी नहीं है। जिसका परिणाम है कि जनपद में भूगर्भ जल का स्तर काफी नीचे चला गया है। लोगों के घरों में लगे लोकल हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं।
इंडिया मार्का हैंडपंप पानी तो दे रहे हैं लेकिन उनमें से बहुतों की हालत खस्ता है। जो हैंडपंप सही तरीके से काम कर रहे हैं उन पर पानी के लिए लोगों की भीड़ लग रही है। नगर क्षेत्र में अमृत योजना के तहत सरकारी भवनों पर वाटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम लगाए जाने थे लेकिन अभी तक उसका कार्य भी शुरू नहीं हो सका है।
जबकि नगरपालिका अध्यक्ष के प्रतिनिधि अभिषेक जायसवाल दीनू ने एक सप्ताह पूर्व बताया था कि इसके लिए दिल्ली में बैठक हुई थी जिसमें उनके साथ एडीएम प्रशासन आशुतोष कुमार द्विवेदी ने हिस्सा लिया था। वाटर हार्वेंस्टिंग के लिए लगभग पांच करोड़ का बजट भी अनुमोदित हुआ था।
लेकिन उसमें से अभी तक सिर्फ 56 लाख रुपये ही नगरपालिका को प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया था कि नगरपालिका सबसे पहले नगर के डीएवी मैदान में बाटर हार्वेंस्टिंग के लिए बोरिंग कराने जा रही है। जिसके लिए कानपुर से बोरिंग की मशीन बुलाई गई है क्योंकि जनपद में छह इंच व्यास की बोरिंग करने का साधन उपलब्ध नहीं है। यह कार्य एक हफ्ते में शुरू हो जाएगा। इस बात को एक हफ्ते से अधिक का समय बीत गया लेकिन अभी तक न तो मशीन आई और ना ही कार्य शुरू हुआ।