आजमगढ़। सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है। 25 अक्तूबर को नहाय-खाय के साथ व्रत शुरू होगा। वहीं शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बने घाटों पर कीचड़ और गंदगी फैली है। जिससे छठ पर घाटों पर आने वाले लोगों परेशानी होगी। हालांकि नगर पालिका और नगर पंचायतों की ओर से घाटों पर सफाई करवाई जा रही है। तमसा के किनारे व कच्चे घाट अभी तक समतल नहीं किए गए हैं। ऐसे में छठ पर सूर्य को अर्घ्य देने में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
26 अक्तूबर को पूरे दिन व्रत रखा जाएगा। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाया जाएगा और फिर सूर्य देव की पूजा करने के बाद यह प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। इसके बाद व्रत का पारण छठ के समापन के बाद ही किया जाएगा। 27 अक्तूबर को श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ उपवास रखेंगे। सूर्य देव की पूजा होगी।
घाट हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। व्रती महिलाएं यहां निर्जला उपवास के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छठ पूजा जैसे महापर्व के प्रति प्रशासन और समितियों की उदासीनता निराशाजनक है। घाट पर पहले से जमा कचरा, झाड़-झंखार है। प्रशासनिक महकमे की माने तो जिले में इस बार 885 घाटों पर व्रती महिलाएं निर्जला व्रत रहकर भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगी। वहीं, पूजा समितियों की ओर से जिले के 50 घाटों पर मूर्ति स्थापित की जाएंगी। इन घाटों को लाइटों से भरपूर सजाया जाएगा। ऐसे में जिम्मेदारों की ओर से घाटों की सफाई न कराना एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है।
घाटों पर तैनात किए गए गोताखोर
लोक आस्था के महापर्व छठ पर पिछले पांच वर्षों में कुल नौ घरों के चिराग बुझे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन भी सतर्क है। घाटों पर गोताखोर लगाए गए हैं। वहां पर नांव की व्यवस्था की गई है। जिससे किसी के डूबने पर उसे समय से बचाया जा सके। वहीं, जिन घाटों पर अधिक पानी हैं वहां पर बैरिकेडिंग करने का काम किया जाएगा। ताकि कोई हादसा न हो सके।
तमसा नदी घाटों की आधी-अधूरी सफाई
अहरौला। छठ पूजा के अवसर पर तमसा नदी के दोनों किनारों पर व्रती महिलाओं की भारी भीड़ जुटती है। एक ओर अहरौला और दूसरी ओर मतलूबपुर ग्रामसभा की सीमाएं लगती हैं। इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन ने दावे तो बड़े किए, लेकिन दोनों घाटों की सफाई अधूरी छोड़ दी गई है। सफाई के नाम पर कुछ स्थानों पर सफाई कर खानापूर्ति की गई है। जबकि नदी के किनारे कीचड़ और गंदगी अब भी जस की तस बनी हुई है।
अवंतिकापुरी पोखरे की सफाई अब तक अधूरी
रानी की सराय। क्षेत्र के अवंतिकापुरी आवंक धाम स्थित पोखरे की सफाई अब तक अधूरी है। पोखरे में जलकुंभी और गंदगी के कारण श्रद्धालुओं में नाराजगी है। व्रती महिलाएं और उनके परिजन स्वयं ही छठ माता की बेदी बनाकर सजावट और रंग-रोगन कर रहे हैं। मंदिर परिसर और रास्तों की सफाई भी नहीं की गई है। मंदिर कमेटी के सदस्य ने बताया कि कल से सफाई कार्य शुरू किया जाएगा ताकि छठ और कार्तिक पूर्णिमा मेले में श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो।
माहुल नगर के पोखरों की हालत बदतर
अंबारी। छठ पूजा को लेकर माहुल नगर के सिद्धपीठ कालीचौरा पोखरे और पटेल नगर पोखरी की सफाई नहीं हुई। कालीचौरा पोखरे के किनारे अब तक 100 से अधिक वेदियां तैयार हो चुकी हैं, लेकिन पोखरे में न तो पर्याप्त पानी है और न ही सफाई। यही हाल वार्ड नंबर 5 के पोखरी का है, जहां घरों से निकलने वाला नाली का पानी जमा हो गया है। भाजपा नेता सुजीत जायसवाल ने कहा कि नगर पंचायत की लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं को असुविधा हो रही है।
21 : माहुल नगर पंचायत में स्थित पोखरे में पानी कम होने से कुछ इस तरह से कीचड़ृ। -संवाद