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Azamgarh News: जिला अस्पताल में न्यूरो सर्जन नहीं होने से नहीं निकाली गई गोली

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आजमगढ़। इसे विभागीय लापरवाही कहें या फिर परिजनों की लापरवाही। फिलहाल चाहे जिसकी भी लापरवाही हो लेकिन एक जान तो खतरे में थी ही।
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जी हां हम बात कर रहे अहरौला थाना क्षेत्र के बहरा कोठी गांव में जयमाल के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में गोली लगने से घायल राम उजागर राम की। उनके हाथ में गोली लगी तो परिजन उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराएं लेकिन 36 घंटे बीत जाने के बाद भी ऑपरेशन नहीं हो सका।
परिजन स्वास्थ्य विभाग पर तो स्वास्थ्य विभाग परिजनों पर इसका ठिकरा फोड़ रहा लेकिन कहीं न कहीं रामउजागर राम की जान तो खतरे में है।
जानकारी मुताबिक अहरौला थाना क्षेत्र के हासापुर गांव निवासी रामदीन राम के पुत्र दीपचंद की बारात मंगलवार को क्षेत्र के बहराकोठी गांव में स्व.शिवप्रसाद के घर गई थी।
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उस बारात में अंबेडकर नगर जनपद के मसोढा कटका गांव निवासी एवं दूल्हा दीपचंद के ममेरा भाई रामउजागिर भी पहुंचे थें। रात करीब 1.30 बजे जयमाल हो रहा था। सभी लोग वर-वधु को आशीर्वाद दे रहे थे कि इसी दौरान हर्ष फायरिंग की गई। जिसमें आशीर्वाद देने पहुंचे रामउजागिर के हाथ में गोली लग गई।
उन्हें तत्काल सीएचसी अहरौला ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। गोली लगने के 36 घंटे बाद भी ऑपरेशन कर गोली नहीं निकाली गई। ऐसे में जान जिला अस्पताल की लापरवाही के कारण खतरे में है।
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इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अशोक कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में न्यूरो सर्जन नहीं हैं। ऐसे में मरीज को यहां से रेफर जाने के लिए कहा गया था लेकिन वह नहीं गए। जब हमारे पास चिकित्सक नहीं हैं तो उनकी गोली कैसे निकाली जाए। संवाद
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