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Azamgarh News: तीन अपात्रों को भी दे दिया पीएम आवास योजना का लाभ

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आजमगढ़। तरवां विकास खंड के मुहम्मदपुर चकसहदरिया ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। गांव निवासी रोहित राजभर की शिकायत पर एडीओ कृषि पल्हना की जांच में तीन अपात्रों के साथ ही दूसरे गांव के दो लोगों को भी आवास देने का खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट आने के बाद पीडी ने डीडीओ और डीपीआरओ को कार्रवाई का निर्देश दिया था। कार्रवाई न होने पर पीडी ने रिमाइंडर जारी किया है। शिकायतकर्ता रोहित राजभर ने कुल 14 लाभार्थियों की सूची उपलब्ध कराकर अपात्रों को आवास देने का आरोप लगाया गया था। इसकी जांच एडीओ कृषि पल्हना रामधनी यादव से कराई गई।
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रामधनी यादव की जांच में आवास आवंटन में गड़बड़ी पाई गई और कई आवास अपूर्ण भी मिले। उन्होंने पाया कि गांव निवासी लोचन पुत्र जानकी ने इस योजना के तहत धन तो ले लिया लेकिन मौके पर एक कमरे की पक्की दीवार पर करकट लगा मिला। आवास पूर्ण नहीं मिला। लोचन पुत्र जानकी को भी इस योजना का लाभ दिया गया है। उसके एक कमरे की पक्की दीवार पर करकट लगा मिला। जांच में उन्होंने पाया कि इनको 2008-09 में महामाया आवास योजना के तहत 35000 रुपये का लाभ दिया गया है और फिर इन्हें साल 2018-19 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1,20,000 रुपये का लाभ दिया गया है। जयहिंद पुत्र विरेंद्र को भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया है। जांच में पाया गया कि इन्होंने पक्की दीवार का निर्माण कराकर उस पर करकट लगवाया है। बगल में ही इनका छह कमरे का पक्का मकान बना मिला।


शामू पुत्र फेरू का तीन कमरे का पक्का मकान बना पाया गया। जांच में पाया गया इनको 2008-09 में महामाया योजना के तहत भी 35 हजार रुपये प्रदान किए गए थे। 2016-17 में फिर प्रधानमंत्री आवास योजना से 1,20,000 रुपये दे दिए गए। इमिरती पत्नी लहजू का चार कमरे का पक्का मकान मिला। जांच में पाया गया है 2008-09 में इन्हें भी महामाया योजना के तहत 35 हजार रुपये मिले थे। इसके बाद फिर 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1,20,000 रुपये प्रदान किए गए।
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शशिकला पत्नी लालसा ने 2022-23 में पैसे लेने के बाद भी आवास का निर्माण नहीं कराया। इंदुकला पत्नी कैलाश को 2022-23 में आवास निर्माण के लिए पहली किस्त मिली लेकिन विवाद के कारण इनके मकान का निर्माण नहीं हो सका। हीरावती पत्नी पारस को 2022-23 में आवास निर्माण के लिए धन मिला लेकिन एक कमरे की पक्की दीवार पर करकट लगा मिला।

इसी तरह से सिद्धन पुत्र सतिराम को 2018-19 में प्रधानमंत्री आवास के लिए धनराशि मिली। जांच में मौके पर पांच कमरे का पक्का मकान बना मिला। हरिश्चंद्र पुत्र बेचू ने 2022-23 में आवास का पैसा मिलने के बाद भी निर्माण नहीं कराया। उमेश पुत्र हंसू को 2018-19 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत धनराशि मिली थी। मौके पर छह कमरे का पक्का मकान बना मिला।

कोई दूसरे गांव का तो कोई रहता है बाहर
जीवलाल पुत्र लौटू को 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास मिला था। ग्रामीणों ने बताया कि वह गांव में न रहकर लालगंज में रहते हैं और उनका मकान नहीं बना है। रामनाथ पुत्र रामकिशन को 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास मिला था। ग्रामवासियों ने बताया कि इस नाम का कोई व्यक्ति गांव में नहीं है। जितेंद्र पुत्र प्रभुनाथ को 2022-23 में आवास का आवंटन किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि वह दूसरे गांव भरथीपुर में रहते हैं। मौके पर हीरावती और इमिरती ने बताया कि ग्राम प्रधान ने आवास के नाम पर उनसे 10 हजार और 40 हजार रुपये लिए हैं। लेकिन, इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला।
जांच रिपोर्ट आने के डीडीओ और डीपीआरओ को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था। उनकी ओर से दोषियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। कई दिन बीतने के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो दोनों को रिमाइंडर जारी किया गया है। - सच्चिदानंद प्रसाद, परियोजना निदेशक।
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