आजमगढ़। फर्जी व कूटरचित अभिलेखों के आधार पर परिषदीय विद्यालयों में कई शिक्षकों ने नियुक्ति पाई है। लगातार चल रही जांच में इन फर्जी शिक्षकों का खुलासा हो रहा है। ऐसे ही आगरा विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्री धारक शिक्षकों की जांच एसटीएफ और एटीएस कर रही थी। इसमें जिले के भी 11 शिक्षक फर्जी चिह्नित किए गए हैं। इनमें पांच शिक्षकों की बर्खास्तगी हो चुकी है तो शेष छह का अभी वेतन ही रोका गया है। अब बेसिक शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने सभी की सेवा समाप्त करने का फरमान जारी कर दिया है।
एसटीएफ और एटीएस ने अपनी जांच में प्रदेश में 1332 फर्जी शिक्षकों को चिह्नित किया था। जिले में भी 11 शिक्षक फर्जी चिह्नित किया था। इसमें पांच शिक्षकों पर बर्खास्तगी की जा चुकी है। वहीं शेष छह शिक्षकों का अभी सिर्फ वेतन रोका गया है। ये अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि इन छह शिक्षकों का मामला कोर्ट में चल रहा है, जिसके चलते इनकी बर्खास्तगी की कार्रवाई नहीं की जा सकी है। कोर्ट का फैसला आने के बाद ही बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी। वहीं बेसिक शिक्षा निर्देश ने अपने फरमान में निर्देशित किया है कि एटीएस व एसटीएफ की जांच में फर्जी घोषित किए गए सभी शिक्षकों पर कार्रवाई पूरी करते हुए रिपोर्ट प्रेषित किया जाए। प्रभारी बीएसए अमर नाथ राय ने बताया कि जिले में चिह्नित 11 फर्जी शिक्षकों में से पांच दीपक गुप्ता, नम्रता यादव, मेनका सिंह, संगीता गुप्ता व उदयभान यादव की सेवा समाप्त की जा चुकी है। उन पर एफआईआर भी दर्ज है और वेतन के रूप में इनके द्वारा आहरित धनराशि की वसूली की जा रही है। वहीं छह अन्य शिक्षकों का फिलहाल वेतन रोक दिया गया है।