मौलाना तसलीम हैदर के चौक से अंजुमन हुसैनिया की ओर से शहीदाने करबला का चेहल्लुम का जुलूस शनिवार शाम को अकीदत के साथ निकाला गया। इस दौरान या अली की सदाओं से पूरा गांव गूंज उठा। नोहाख्वानी और मातम से खिराजे अकीदत पेश की गई।
स्याह माहौल में निकाए गए जुलूस में खिराजे अकीदत पेश करने अजादारों का हुजूम उमड़ पड़ा। गांव के विभिन्न चौक और अजाखानों के सामने अंजुमनों ने नौहाख्वानी कर मातम पेश किया। इसमें अजुंमन मोइनुल मोमनीन शाहगंज भादी, गुलशने इस्लाम मित्तूपुर, अंजुमन गुन्च ए नासिरूल अजा बड़ागांव जौनपुर ने नौहाख्वानी की। मौलाना वसी मुहम्मद खां साहब, मौलाना जावेद खतीबी, मौलाना सैयद काजिम अब्बास, मौलाना नकी मुर्तुजा ने मजलिस को खिताब किया। जुलूस जब माहुल रोड पर पहुंचा तो वहां लोगों की काफी भीड़ जुट गई। जाम लग जाने के कारण बड़े वाहनो को दूसरे रास्ते से गुजारा गया। जुलूस का समापन लगभग सात बजे शाम को कर्बला में किया गया। संचालन सहर अरशी जौनपुरी ने किया। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस और पीएसी लगाई गई थी।
जुलूस निकलने से पूर्व मजजिस आयोजित कह गई। इसके बाद स्थानीय अंजुमन मासूमिया और समंदपुर की अंजुमन ने नौहा पेश किया। दो स्थानो पर तकरीरे आयोजित की गयी। रास्ते भर अंजुमने नौहा मातम पेश करती चल रही थी। मौलाना ने मजलिस मे कहा कि जनाबे जैनब ने ही दुनिया को बतलाया था कि करबला में इमाम हुसैन को कुरबानी देने की क्या वजह थी। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया में इमाम हुसैन का गम अकीदत के साथ मनाते है। कमर मियां के चौक होते हुए जुलस मछली मार्केट, शाहगज-आजमगढ मार्ग होते हुए मुन्डियार रोड पहुचां जहा लोगो की काफी भीड हो गई। जुलूस शाम को करबला पहुचा जहां ताजिया दफन किया गया। सुरक्षा के तहत जुलूस के साथ स्थानीय पुलिस चल रही थी।