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गन्ना किसानों को मिलने लगेंगी डिजिटल पर्चियां

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सठियांव। दि किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव के चौथे पेराई सत्र में गन्ना किसानों को उनके मोबाइल पर एसएमएस के जरिए डिजिटल पर्चियां मिलने लगेंगी। 19 नवंबर से ढोंगा पूजन के बाद शुरू हो रहे नए पेराई सत्र को ध्यान में रखते हुए मिल से संबंधित किसानों को पहले पर्चियां जारी करने का निर्णय लिया है। उसी दिन से संबंधित मिलों के गन्ना क्रय केंद्रों पर तोल भी शुरू कराने की तैयारी की गई है। कुल 37 क्रय केंद्र संचालित होंगे।
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मुख्य गन्ना अधिकारी विनय प्रताप के अनुसार गन्ना ढुलाई के कुल 16 टेंडर फाइनल हो चुके हैं। शेष 19 की प्रक्रिया अभी लंबित है। प्रधान प्रबंधक प्रताप नारायण ने बताया कि गन्ना सप्लाई के लिए कलेंडरिंग का मूल्यांकन आखिरी दौर में है। गन्ने की उपलब्धता के बाद 21 नवंबर से क्रशिंग चालू हो जाएगी। पिछले सत्र के हिसाब से इस बार भी पेराई का लक्ष्य जो नवनिर्मित मिल इतिहास में अब तक पूरा नहीं हुआ उसे अब 50 लाख क्विंटल रखा गया है। मशीनों की साफ-सफाई व मरम्मत हो चुकी है। पूजन के बाद पेराई शुरू हो जाएगी।
बार-बार कैंसिल हो रहा गन्ना ढुलाई का टेंडर
चीनी मिल सठियांव में गन्ना ढुलाई का टेंडर बार-बार कैंसिल हो रहा है। अब तक चौथी बार कैंसिल हो चुका है। प्रबंधन तंत्र मिल संघ के नए नियम का हवाला दे रहा है। वहीं विपक्षी डायरेक्टर ने कहा कि गन्ना ढुलाई का टेंडर बार-बार कैंसिल होने के कारण अभी 21 टेंडर पेंडिंग है। प्रबंधन तंत्र का कहना है कि नए नियम में ठेकेदार के पास कागज पत्र के साथ दो ट्रक का होना जरूरी है। छानबीन में अधिकतर ठेकेदारों ने नंबर गलत दिया था। जबकि विपक्ष कहता है कि टेंडर दबाव में कैंसिल हो रहा है। नंबर कोई एक बार गलत देगा बार-बार नहीं। सभी ठेकेदार अनुभवी और पिछले सत्रों में गन्ना सप्लाई कर चुके हैं।
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किसानों का करोड़ों बकाया
चीनी मिल अपना पेराई सत्र शुरू करने तो जा रही लेकिन अभी तक किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान नहीं हुआ है। किसानों का कुल 54 करोड़ 17 लाख 27 हजार रुपये बाकी हैं। शुक्रवार को मिल पहुंचे धरवारा के किसान बृजनाथ सिंह ने अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहा कि जोताई, बुआई और खाद व बीज के लिए पैसा नहीं है। सरकार को हम किसानों की समस्या को समझना होगा। किसानों ने जनवरी में गन्ना सप्लाई किया गया है। अधिकारी ने बताया भुगतान मिल चलने पर होगा। कुछ इसी तरह का मामला दाउदपुर के जितेंद्र का है। उन्होंने कहा कि कितने किसान भुगतान के आसरे पर शादी व विवाह तय कर चुके हैं। अब पैसे के लिए मिल की गणेश परिक्रमा कर रहे हैं।
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