सठियांव। दि किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव गन्ने की उपलब्धता न होने से रुक-रुक कर चल रही है। निर्धारित क्षमता से न चलने व बीच में ब्रेक के कारण फैक्ट्री का पीयू (क्षमता उपयोग) लगातार गिर रहा है। चीनी मिल सठियांव ने 26 फरवरी को 19 हजार, 27 को 25 हजार और 28 फरवरी को 12 हजार 300 क्विंटल गन्ने की खरीद की है। मिल की पेराई क्षमता 35 हजार क्विंटल है। हालत यह है कि दो से तीन दिन तक गन्ना इकट्ठा करने के बाद मिल में पेराई कराई जा रही है।
मिल पूरी क्षमता से न चलने के कारण क्षमता उपयोगिता घट कर 80 फीसदी पर आ गईं है। उधर, मिल को बराबर चालू रखने के लिए श्रमिकों, तेल, ग्रीस व चूना आदि पर प्रतिदिन लाखों खर्च हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त गुड़ पकाने वाले क्वाड की सफाई में करीब दो लाख अलग से खर्च होते हैं। मिल संचालित करने वाली संस्था का खर्च 84.40 लाख प्रति माह अलग से है। गन्ना विभाग के अभी 50 कर्मचारी अलग से लगे हैं। मिल प्रबंधन जल्द से जल्द फैक्ट्री बंद करना चाहता है, लेकिन पेच यह फंसा है कि बंद करने से पहले मिल के रजिस्टार (जिला गन्ना अधिकारी) से सहमति (एनओसी) लेनी होगी। जानकारों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि इस बार एक क्विंटल चीनी बनाने में 5810 रुपये का खर्च आ रहा है। जबकि सीजन 2019-20 में चार हजार 580 और वर्ष 2018-19 में चार हजार रुपये प्रति क्विंटल खर्च पड़ा था। मुख्य गन्ना अधिकारी डा. विनय प्रताप सिंह ने बताया कि मिल में अब दो से तीन हजार क्विंटल गन्ना मिलने की उम्मीद है।