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सूबे की सत्ता आजम के हाथ में

Mon, 06 Jul 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़
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आजमगढ़। श्रीराम जन्म भूमि न्यास ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य और पूर्व सांसद डा. रामविलास वेदांती रविवार को प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां पर जमकर बरसे। साथ ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भी व्यंग्य के तीर चलाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में चुनाव के बाद आजम खां सीएम बनना चाहते थे। सपा मुखिया ने इसपर हामी भी भर दी थी, लेकिन पुत्र मोह में फंसे मुलायम सिंह ने अखिलेश को मुख्यमंत्री बना दिया।
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भवनाथ परिसर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह के दौरान अखिलेश का मंच तोड़ने में भी आजम खां के लोगों का ही हाथ था पर सब कुछ जानते हुए भी मुलायम और अखिलेश कुछ बोल नहीं सके, क्योंकि अगर वे बोलते हैं तो जिनका साथ उन्हें मिला है वह छूट जाता। उन्होंने कहा कि 2013 में जब हम लोगों ने अयोध्या में 84 कोसी परिक्रमा का निर्णय लिया और मुख्यमंत्री के पास पहुंचे तो उन्होंने कुछ शर्तों पर इजाजत दे दी, लेकिन जब यह जानकारी आजम खां को हुई तो वह अखिलेश और मुलायम के पास पहुंचे। उनके विरोध पर परिक्रमा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हम लोगों को लखनऊ की ऐसी जेल में भेजा गया जहां आतंकवादी बंद थे। जैसे ही हम लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे के साथ जेल में प्रवेश किया, हम पर पत्थरों की बरसात हुई। उन्होंने कहा कि शासन तो अखिलेश चला रहे हैं लेकिन सत्ता की बागडोर आजम के हाथ में है।
डा. वेदांती ने पहली बार सुनने में आया कि यादव ही यादव का होता है क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो मुलायम सिंह सैफई छोड़कर आजमगढ़ से चुनाव लड़ने क्यों आते। इसके बाद भी रमाकांत यादव चुनाव हारे नहीं बल्कि उन्हें हराया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हिंदू किसी दर्जे के नहीं हैं। यहां हिंदूओं को दोयम दर्जे में भी नहीं रखा गया है। मुलायम और अखिलेश के शब्दकोष में हिंदू शब्द है ही नहीं। आजम खां जो कहते हैं वहीं दोनों करते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि 2017 में विधानसभा चुनाव में सपा की हालत बसपा जैसी होगी और भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने आशंका जताई कि कि चुनाव से पहले प्रदेश में बड़ी आतंकी घटना हो सकती है। डा. वेदांती ने कहा कि अगर राज्यसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पास हो गया तो 2019 में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। धारा 370 और रामजन्म भूमि सहित कई मुद्दे प्रधानमंत्री की योजना में हैं लेकिन इनपर अमल कब होगा, यह कहना मुश्किल है।
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