आजमगढ़। शहर से सटे जाफरपुर में बंग सोसाइटी द्वारा आयोजित चार दिवसीय दुर्गा पूजा समारोह अपनी अनूठी परंपराओं और सामाजिक समरसता के लिए विशेष पहचान रखता है। वर्ष 1956 से चली आ रही इस परंपरा के तहत, सप्तमी से नवमी तक माता रानी को केवल फलाहार ही नहीं, बल्कि पूरे भोजन का भोग लगाया जाता है। इस भोजन में चार दालों की खिचड़ी, सब्जी, चटनी, पापड़ और शाम को हलवा-पूरी शामिल होती है।
भोग के बाद, सभी भक्त बिना किसी भेदभाव के जमीन पर एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं और अंत में अपनी पत्तल स्वयं उठाते हैं। पूजा के लिए पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा से विशेष पुरोहित और ढाकी कलाकार बुलाए गए हैं। आरती के दौरान पारंपरिक धुनोची नृत्य मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। यह उत्सव 16 अक्तूबर को प्रतिमा स्थापना के साथ शुरू हुआ। 17 से 20 अक्तूबर तक सामूहिक प्रसाद वितरण होगा, और 21 अक्तूबर विजयादशमी को सिधारी स्थित कृत्रिम तालाब में प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।