आजमगढ़। ईओडब्ल्यू की जांच में जिले में 219 मदरसों का अस्तित्व ही नहीं मिला था। इस मामले में ईओडब्ल्यू के निरीक्षक कुंवर ब्रह्म प्रकाश सिंह की ओर से जिले के विभिन्न थानों में 207 मदरसा संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
विवेचना की गति धीमी होने के कारण एक दो मदरसा संचालकों को छोड़कर अन्य के खिलाफ कार्रवाई ठप पड़ी थी। समीक्षा के दौरान एसपी ने जब विवेचकों के पेंच कसे तो धड़ाधड़ फर्जी मदरसा संचालकों की गिरफ्तारी शुरू हो गई। इसका परिणाम रहा कि जिले में दो दिनों में चार फर्जी मदरसा संचालकों को गिरफ्तार किया गया।
बता दें कि लगभग एक साल पहले ईओडब्ल्यू की टीम अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंची थी और इन मदरसों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर तैयार की गई थी। तहरीर के मुताबिक, विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अभिलेखों के आधार पर मदरसा अजीजिया खड़गपुर कंधरापुर को अस्तित्वहीन मदरसों की श्रेणी में पाया।
इस मदरसे को 5 फरवरी 2009 में तहतानिया स्तर की अस्थायी मान्यता दी गई थी। यह मान्यता तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रभात कुमार और लिपिक वक्फ ओम प्रकाश पांडेय ने दी थी।
मदरसे की ओर से मदरसा पोर्टल पर तहतानिया स्तर के 03 कक्ष 300 वर्गफीट माप के दर्शाए गए हैं, जबकि मौके पर मदरसा संचालित होते नहीं मिला। बाद में भारतीय जनता इंटर कॉलेज को मदरसा बताया गया। पोर्टल पर दर्ज सूचना के अनुसार, मदरसे में तहतानिया स्तर के 110 छात्र पढ़ते हैं।
लेकिन यह बात भी जांच में गलत पाई गई। इसी तरह से टीम ने जब कागजों में संचालित मदरसों की जांच की तो कहीं मदरसे की जगह शटर लगाकर दुकानें बनाई गईं थीं तो कहीं इंटर कॉलेज को ही लोगों ने मदरसा दिखाकर मान्यता ली थी। ऐसे जिले में कुल 219 मदरसे संचालित मिले थे।
ईओ डब्ल्यू के निरीक्षक ब्रह्म प्रकाश सिंह की ओर से 207 के खिलाफ 2025 में ही संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विवेचना शुरू हुई लेकिन इसकी गति इतनी धीमी थी एक साल बीतने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
समीक्षा के दौरान एसपी ने विवेचकों के जब पेच कसे तो इसमें तेजी आ गई है। दो दिनों में 4 मदरसा संचालकों की हुई गिरफ्तारी से अन्य संचालकों में हड़कंप मच गया है।