सपा कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते करते विधायक नफीस अहमद और हवलदार यादव।
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आजमगढ़। कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ द्वारा अखिलेश लापता के पोस्टर चिपकाने से नाराज सपा की ओर से रविवार को पार्टी कार्यालय में प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। जिसमें सपा के गोपालपुर विधायक नफीस अहमद से कांग्रेस और भाजपा को एक सिक्के के दो पहलू बताते हुए आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव कई बार जनपद आ चुके हैं। उनकी गैर मौजूदगी में उनके सिपाही हर मोड़ पर खड़े हैं और हर पीड़ित की आवाज को उठाने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को निशाना बनाया जा रहा है। उनके द्वारा कहा जा रहा है कि मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में कई बार आए लेकिन अखिलेश यादव नहीं आए। जबकि अखिलेश यादव चुनाव जीतने के बाद कई बार जनपद आ चुके हैं। जहां वह नहीं होते हैं वहां उनके सिपाही पीड़ितों की मदद को तत्पर हैं। लेकिन जो कांग्रेस आज मुसलमानों के हमदर्द होने का दावा कर रही है वह उस दिन कहां थी जब बिलरियागंज में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा था और पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठी भांजी। सपा के लोग तो घटना स्थल पर पहुंचे और अपना प्रतिनिधि भी भेजा। हमारे द्वारा इस घटना की निंदा की गई। लेकिन यह लोग बिलरियागंज नहीं पहुंचे सिर्फ जिले पर ही इनके द्वारा दिखावा किया जा रहा है। देश की आजादी के बाद सबसे ज्यादा कांग्रेस का शासन काल रहा इस दौरान ही मुसलमानों का सबसे ज्यादा शोषण हुआ। आज इनकी गलत नीतियों की वजह से ही बीजेपी की सरकार बनी है। सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने ओलमा कौंसिल द्वारा लगाए गए आरोप के जवाब में कहा कि ओलमा कौंसिल बीजेपी की बी टीम है। इसलिए उसके बारे में कुछ नहीं कहना है। भाजपा सरकार पर हमला करते हुए कहा कि इन लोगों ने सपा सरकार में संचालित योजनाओं को बंद कर दिया। हम गरीबों को लोहिया आवास बनवाने के लिए तीन लाख रुपये देते थे। वहीं महंगाई के इस जमाने में सरकार ने उसे घटाकर सवा लाख कर दिया।