जिले के निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र में हर बार चुनाव काफी प्रतिष्ठापरक रहा है। सन 1977 से 2012 तक के विधानसभा चुनावों पर गौर करें तो इस सीट पर चार बार सपा और पांच बार बसपा का कब्जा रहा है। 1996, 2002 और 2012 के विधानसभा चुनाव में विधायक रह चुके आलमबदी इस बार फिर सपा के टिकट पर मैदान में हैं।
जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में तमसा के तट पर स्थित निजामाबाद क्षेत्र ऐतिहासिक धरोहरों का केंद्र है। यह प्रख्यात कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध, पं. राहुल संकृत्यायन की भी जन्मस्थली है। एक तरफ जहां ऐतिहासिक गुरुद्वारा चरण पादुका साहिब गुरुद्वारा है तो दूसरी तरफ दत्तात्रेय धाम स्थित है। यहां का ब्लैक पाटरी उद्योग विश्व प्रसिद्ध है।
तमाम ऐतिहासिक विरासतों को अपने अंदर समेटे निजामाबाद क्षेत्र की पहचान भले ही काफी दूर तक है लेकिन क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो सका। अब तक हुए विधायकों ने सड़के, पुल आदि भले ही बनवाएं हों लेकिन साहित्यिक धार्मिक तथा ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का अपेक्षित काम किसी ने नहीं किया। ब्लैड पाटरी उद्योग और शिल्पियों को बढ़ावा देने के लिए कुछ खास नहीं किया जा सका है।
शिल्पियों के लिए कई योजनाएं चलाने के आश्वासन तो दिए गए लेकिन इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। अभी तक इलेक्ट्रानिक भट्ठी का इंतजाम नहीं किया गया। ब्लैक पाटरी को निश्चित तापमान पर पकाया जाता है जिससे इसकी चमक और खूबसूरती बनी रहती है। इसका साफ उदाहरण प्रसिद्ध दत्तात्रेय धाम मंदिर है। इस स्थल का भी अपेक्षित विकास नहीं हो सका। वर्षों पहले भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की अष्ठधातु की प्रतिमा चोरी हुई थी।
पुलिस ने इन प्रतिमाओं को बरामद कर लिया। यहां के विश्व प्रसिद्ध ब्लैक पाटरी उद्योग को भी उतना बढ़ावा नहीं मिल सका जितना मिलना चाहिए। क्षेत्र में परिवहन की भी कोई व्यवस्था नहीं है। यहां ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें भी खस्ताहाल हैं।