आजमगढ़। जल्द ही ग्रामीण और शहरी इलाकों में महिलाएं आटो लेकर फर्राटा भरती नजर आएं तो ताज्जुब न करें। क्योंकि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार देने और उन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए डीसी एनआरएलएम द्वारा इनको इंफार्मेशन बोर्ड बनाने और आटो चलाने की ट्रेनिंग दिलाने जा रहे हैं। इसके बाद इन्हें मुद्रा योजना से लोन दिलाकर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
शासन की मंशा है कि ग्रामीण गरीब महिलाओं का स्वयं समूह सहायता समूह बनाकर उन्हें प्रशिक्षण दिलाकर रोजगार से जोड़ा जा सके। ताकि वह घर बैठे तीन से चार हजार रुपये की आमदनी कर सकें। इस कार्य की जिम्मेदारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को सौंपी गई है। विभाग स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं केे आत्मनिर्भर बनाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाने में जुटा हुआ है। डीसी एनआरएलएम द्वारा इन महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिए जाने की योजना बनाई गई है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह की इन महिलाओं को मुद्रा योजना के तहत लोन दिलाया जाएगा। इस लोन से उन्हें आटो क्रय कराया जाएगा। जिसके जरिये महिलाएं बच्चों को स्कूल छोड़ने आदि का कार्य कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगी। डीसी एनआरएलएम द्वारा समूह की इन महिलाओं को इंफार्मेशन बोर्ड बनाने की ट्रेनिंग देने का निर्णय लिया गया है। महिलाएं ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद अपने घर पर ही इंफार्मेशन बोर्ड का निर्माण कर ग्राम पंचायतों को बिक्री करेंगी। जिसे ग्राम प्रधान द्वारा गांव में होने वाले कार्यों के बारे में जानकारी देने के लिए प्रयोग किया जाएगा।
मोटर ट्रेनिंग स्कूलों से साधा जा रहा संपर्क
स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं को वाहन चलाने के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। जिसके लिए विभाग की ओर से मोटर ट्रेनिंग स्कूलों से संपर्क साधा जा रहा है। जिसके तहत अब तक आठ मोटर ट्रेनिंग स्कूलों को चिन्हित भी कर लिया गया है। डीसी एनआरएलएम द्वारा इनके संचालकों को मीटिंग के लिए बुलाया गया है।
इंफार्मेशन बोर्ड का होगा तीन दिवसीय प्रशिक्षण
इन महिलाओं को इंफार्मेशन बोर्ड बनाने की ट्रेनिंग राजगीरों द्वारा दी जाएगी। जो तीन दिन की होगी। इस प्रशिक्षण में उन्हें बताया जाएगा कि किस प्रकार बोर्ड बनाने के लिए उन्हें तारों का जाल बनाना है। बोर्ड को बनाने में कौन सा मैटेरियल कितनी मात्रा में प्रयुक्त होगा। जब यह महिलाएं बोर्ड तैयार कर लेंगी तो उसे ग्राम प्रधानों द्वारा तीन से साढ़े तीन हजार रुपये में खरीद कर खुद द्वारा कराए गए कार्य की पूरी जानकारी उस पर प्रदर्शित की जाएगी।
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इसका मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार उपलब्ध कराना है। अगर महिलाएं आटो चलाती हैं तो लोग अपनी बच्चियों को इनके साथ विद्यालय भेजने में हिचकेंगे नहीं। इसके लिए मोटर वाहन स्कूल संचालकों से संपर्क साधकर उन्हें मीटिंग के लिए बुलाया गया है। - बीके मोहन, डीसी एनआरएलएम।