मजरूह सुल्तानपुरी,निजामाबाद ।-फाइल फोटो
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निजामाबाद। प्रख्यात गीतकार एवं शायर मजरूह सुल्तानपुर की 101वीं जयंती पर गुरुद्वारा चरण पादुका साहिब के प्रांगण में कार्यक्रम हुआ। उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। भारतीय सांस्कृतिक सहयोग एवं मैत्री संघ इसकफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र हरि पांडेय ने कहा कि आजमगढ़ के इतिहास में वर्ष 1919 एक तारीखी वर्ष है। क्योंकि उसी वर्ष 14 जनवरी को मेजवां फूलपुर में कैफी आजमी और एक अक्टूबर को निजामाबाद कस्बे में मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म हुआ था।
दोनों अपनी जवानी में तरक्की पसंद शेरों, शायरी के साथ कम्युनिस्ट मूवमेन्ट के साथ जुड़ गए। उस दौर की फिल्मों में दोनों के गीत अमर हैं। आज हमें ऐसी विभूतियों के विचारों और उनकी लेखनी को सजाने संवारने के साथ ही गंगा जमुनी संस्कृति को मजबूत करने की जरूरत है। डॉ. शाहनवाज खान ने कहा कि मजरूह साहब यदि गीतकार न भी बनते तो भी उर्दू अदब में उनका वह मुकाम होता जो मिर्जा गालिब और अल्लामा इकबाल का है। उनका एक मजमुआ कलाम ही उन्हें अदब में जिंदा जावेद रखेगा। गुरुद्वारे के सेवादार जगदीश सिंह सलूजा ने कहा कि हमें फ़क्र है कि जहां गुरु नानक देव, गुरु तेगबहादुर के पग पड़े। उस धरती पर ऐसे महान विभूति पैदा हुए। इस मौके प्रबदुल रहमान सिद्दीकी, इकबाल अहमद, गुरुप्रीत सिंह, रमनदीप सिंह, डॉ. इरफान, शिवम पाठक, दीप सिंह आदि मौजूद रहे।