माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं के लिए केंद्र निर्धारण की नई और सख्त नीति जारी की है। अब परीक्षा केंद्र तय करने में केवल विद्यालय भवन, कमरों की संख्या और बुनियादी सुविधाएं ही पर्याप्त नहीं होंगी।
विद्यालयों की शैक्षणिक स्थिति, विद्यार्थियों की मेधा और ऑनलाइन उपस्थिति भी केंद्र निर्धारण में अहम भूमिका निभाएगी। नई व्यवस्था के तहत परीक्षा केंद्र के लिए विद्यालयों की रैंकिंग और रेटिंग तैयार की जाएगी।
इसमें बायोमेट्रिक या ऑनलाइन माध्यम से दर्ज होने वाली विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। जिन विद्यालयों में लगातार 180 दिनों तक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होगी, उन्हें परीक्षा केंद्र की सूची में प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही विद्यालय में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थियों के प्रदर्शन और उनके परीक्षा परिणाम को भी रेटिंग में शामिल किया जाएगा। इससे विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता और विद्यार्थियों की उपलब्धियों का भी केंद्र निर्धारण में असर पड़ेगा।
डीआईओएस अजय कुमार ने बताया कि नई व्यवस्था में परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत शासकीय (राजकीय) और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को पहली वरीयता देने की व्यवस्था की गई है।
विद्यालयों की उपलब्ध सुविधाओं के साथ अब शैक्षणिक प्रदर्शन और ऑनलाइन उपस्थिति के आंकड़े भी केंद्र निर्धारण में महत्वपूर्ण होंगे। इससे विद्यालयों को नियमित ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के साथ विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर देना होगा।
बोर्ड की नई व्यवस्था में परीक्षा केंद्र के लिए विद्यालयों की दावेदारी अब केवल भौतिक संसाधनों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके स्मार्ट परफॉर्मेंस के आधार पर तय होने की दिशा में है।