लाटघाट। देवारावासियों का सब कुछ उजाड़ने के बाद घाघरा नदी शांत हो चुकी है लेकिन अपने पीछे तबाही का ऐसा मंजर छोड़ गई है कि देवारावासी उससे उबर नहीं पा रहे हैं। जिन खेतों में उन लोगों ने धान और गन्ना की फसलें लगा रखी थी फसलों के साथ ही खेत भी घाघरा में विलीन हो चुके हैं। घर में रखा अनाज बाढ़ के पानी में भीगकर खराब हो चुका है। कई लोगों ने अपनी बेटियों की शादी तय कर रखी है। लेकिन अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वो बेटी के हाथ कैसे पीले करें।
हरैया विकासखंड के देवारा खास राजा ग्राम पंचायत के मुरारी का पुरवा, त्रिलोकी का पुरवा, भिमली का पुरवा, बगहवा सहित कुल 75 घर घाघरा में विलीन हो गए। इनकी घर गृहस्थी तो गई ही इनका निवाला भी छिन गया। जिन खेतों में गेहूं, चावल और गन्ना पैदा करते थे। वह जमीन भी घाघरा कटान की भेंट चढ़ गई। देवारा क्षेत्र में लोग मुख्य रूप से गन्ने की खेती करते हैं। बाद में इसे चीनी मिल को आपूर्ति कर मिलने वाली रकम से अपने जरूरी काम निपटाते हैं लेकिन इस बार घाघरा की बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया है। बहुत से घरों से नवंबर और दिसंबर में शादी है। अब उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वो क्या करें। बहुत से लोग कर्ज लेने की तैयारी में जुटे हुए हैं ताकि बेटी की डोली को विदा कर सकें।
दिसंबर में है बेटी की शादी, दिमाग नहीं कर रहा काम
लाटघाट। रीता पत्नी जयनारायण ने बताया छह दिसंबर को बेटी की शादी तय है। घर में अनाज का एक दाना नहीं है। जो धान और गन्ने की फसल लगाई थी वह भी बर्बाद हो गई। बरात का स्वागत और बेटी की विदाई करेंगे दिमाग काम नहीं कर रहा है। इसके लिए जगह-जगह हाथ पैर मार रहे हैं। रिश्तेदारों से भी मांग कर रहे हैं। बैंक से भी कर्ज लेने की कोशिश में जुटे हैं कि कहीं से भी कोई व्यवस्था हो जाए।
अभी तक नहीं मिला कटे खेत और फसल का मुआवजा
लाटघाट। शिव लखन ने बताया कि 30 अप्रैल को घर में भतीजी की शादी है। खेती की सारी जमीन घाघरा में विलीन हो चुकी है। इसके साथ ही जो फसल खेत में बोई गई थी वह भी कटान की भेंट चढ़ गई। हमारी मुख्य फसल गन्ना है जिसे बेचकर हम लोग काम करते हैं। वह भी घाघरा में चली गई। अब कहीं न कहीं कर्ज लेकर ही शादी विवाह करना होगा क्योंकि जो खेती कटी है उसका अभी तक मुआवजा तक नहीं मिला।
छह बीघे में बोई थी फसल, सोचा था धूमधाम से करेंगे पोती की शादी
लाटघाट। वृद्ध लोहारा पत्नी सेवक कहती हैं कि पोती की शादी अगहन में तय है। हमारे पास छह बीघा जमीन थी जिसमें गन्ना और धान लगाया गया था। सोचा था कि होने वाली फसल की बिक्री कर धूमधाम से पोती की शादी करेंगे। लेकिन सब कुछ बर्बाद हो गया। अनुदान के नाम पर अभी कुछ नहीं मिला। फसल का मुआवजा भी नहीं मिला। घर कटा उसकी भी जमीन नहीं मिली और न घर के लिए पैसे। अब कर्ज लेकर विवाह करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचा।
फसल के साथ 12 बीघा जमीन घाघरा में समाई
लाटघाट। आशा पत्नी अशोक ने बताया कि 12 बीघा जमीन जिसमें फसल तैयार थी, घाघरा में कटकर विलीन हो गई। हमारे क्षेत्र में गन्ने की फसल को लोग इसी उद्देश्य से लगते हैं कि इसकी बिक्री से मिलने वाले पैसे से बेटियों का शादी विवाह आसानी से कर लेंगे लेकिन घाघरा ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जिनके घरों में शादी पड़ी है। वह लोग कर्ज लेने के लिए दर बदर की ठोकरें खा रहे हैं। अभी प्रशासन की ओर से किसी केे कटी जमीनों का मुआवजा भी नहीं मिला है। जिसके कारण लोग परेशान हैं।
हम लोगों की तरफ से 50 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई है। जब तक प्रदेश के सभी जनपदों से डिमांड नहीं आ जाएगी तब तक राज्य सरकार इसे केंद्र सरकार को नहीं भेजेगी। पैसा केंद्र सरकार से ही मिलना है लेकिन हाल ही में हुई वीसी में बताया गया कि जो खेत कटे हैं उसका पैसा राज्य सरकार जल्द देगी लेकिन कब तक यह नहीं बताया गया। जैसे ही पैसा मिल जाएगा किसानों को वितरित कर दिया जाएगा। - गुरु प्रसाद गुप्ता, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
देवारा खास राजा गांव में घाघरा की कटान में विलीन आवासीय घर।- फोटो : AZAMGARH