इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर मिर्जा महमूद ने कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी और उनके सहायकों ने अरबी भाषा में जो पुस्तकें लिखी हैं उसमें आजादी से पहले और बाद का जिक्र है। यह किताबें अरब देशों में भी सराही जाती हैं।
वह सोमवार को शिब्ली एकेडमी हाल में सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी की किताब (अल इंतेकाब) की सराहना न केवल भारत बल्कि अरब देश के लोग भी करते हैं।
वहां के साहित्यकार आज तक ऐसी किताब नहीं लिख सके। मुंबई विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर अब्दुल्ला इम्तेयाज ने दारुल मुसन्नफीन के सहायकों की तारीफ करते हुए कहा कि इन लोगों ने अल्लामा शिब्ली के किताबों को अमली जामा पहनाया है।
कहा कि इनकी मेहनत के चलते ही अल्लाम शिब्ली की किताबों को दूसरे मुल्कों तक पहचान मिल सकी। नोमानी के प्रति यह सच्ची खिराजे अकीदत होगी।
हमे उनकी रचनाओं की हिफाजत करने के साथ ही दूसरों तक पहुंचाना भी है। ऐसे लोगों की उसकी जितनी तारीफ की जाए, कम है।
शिब्ली नेशनल कालेज के उर्दू विभागाध्यक्ष डा. शबाबुद्दीन ने अल्लामा शिब्ली नोमानी की जिंदगी पर रोशनी डाली और दारुल मुसन्नफीन को तरक्की का जामा पहनाने वालों का जिक्र किया।
शिब्ली एकेडमी के स्कालर उमैर सिद्दीक नदवी ने भी अल्लामा शिब्ली नोमानी, सैय्यद सुलेमान नदवी का जिक्र किया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कमरुलहुदा फरीदी ने शोध पत्र पढ़ा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर यासीन मजहर सिद्दीकी और संचालन मुंबई के डा. जमशेद अहमद नदवी ने किया।
अंत में शिब्ली एकेडमी के डायरेक्टर इश्तेयाक अहमद जिल्ली ने शोध पत्र पढने वाले शोधार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।