आजमगढ़। नेहरू हॉल के सभागार में रविवार को समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव की दूसरी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा हुई। सर्वप्रथम अतिथियों ने चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। मुख्य वक्ता गोविंद यादव ने कहा कि शरद यादव एक राजनेता का नाम नहीं हैं बल्कि क्रांति और परिवर्तन का नाम हैं। उनके पदचिह्नों पर चलकर सही लोकतंत्र की स्थापना की जा सकती है। उनका आजमगढ़ से काफी लगाव रहा।
लोकसभा व राज्यसभा के कई बार सांसद रहे। उनके पिता कांग्रेसी थे, लेकिन शरद यादव के अंदर क्रांति और परिवर्तन की भूख थी जो पूरे राजनीतिक दिनों में दिखाई दी। आज के राजनीतिक दल एक कंपनी के रूप में काम कर रहे हैं। देश के अंदर पिछले 30 सालों से सार्वजनिक संपत्तियां निजी क्षेत्र के हाथों में नीलाम हो रही हैं। विजय नारायण ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है। इस आवाज को सरकार जितना कुचलने की कोशिश करेगी, उतने ही आंदोलन जन्म लेंगे। कहा कि भाजपा सरकार को मौजूदा व्यवस्था से बदला नहीं जा सकता, केवल जन क्रांति के ही इस सरकार को उखाड़ा जा सकता है। इस मौके पर जयप्रकाश राय, रामकुमार यादव, कामरेड मोती यादव, दिनेश यादव, योगेंद्र यादव, राजनाथ, बुद्धिराम यादव आदि मौजूद थे।संवाद