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शबद-कीर्तन और गुरुबानी से संगत हुई निहाल

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शहर के मातवागंज स्थित गुरु द्वारे पर गरु गोविंद सिंह के प्रकाशोत्सव पर शबद र्कितन करते श्रद्घाल? - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़/निजामाबाद/फुलपुर। जनपद के विभिन्न गुरुद्वारों में बृहस्पतिवार को गुरु गोविंद सिंह का प्रकाशोत्सव धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। गुरुद्वारे में सहज पाठ हुआ। लंगर के दौरान श्रद्धालुओं में प्रसाद बांटा गया।
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श्री सुंदर गुरुद्वारा मातबरगंज में गुरु गोविंद सिंह महाराज का 353 वां प्रकाशोत्सव मनाया गया। गुरुद्वारे में सहज पाठ हुआ। शबद कीर्तन और गुरुबानी से संगत निहाल हुई। श्याम सुंदर अरोरा ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह महाराज ने 1699 में खालसापंत की स्थापना की। उन्होंने जातियों का भेद मिटाकर अमृत पान कराकर पंच प्यारे सजाए। फिर उन्हीं से अमृत पान कर गोविंद राय से गुरु गोविंद सिंह बन गए। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद कड़ाह प्रसाद और लंगर का आयोजन किया। राजेश अरोरा, जगदीश अरोरा, संगम अरोरा, गुरु प्रकाश आदि रहे।
निजामाबाद स्थित गुरुद्वारा चरण पादुका साहिब में भी प्रकाश उत्सव मनाया गया। शाम चार बजे से श्री सुखमणि साहिब का पाठ के साथ शुरुआत की गई। मुख्य रूप से चौपाई साहिब, रहरास साहिब, आनंद साहिब का पाठ अरदास के साथ हुकुमनामा पढ़ा गया। शाम सात बजे प्रसाद का वितरण किया गया। राघवेंद्र सिंह, सूरज सिंह, तीरथ सिंह, दर्शन सिंह, रानू गौड़, ईओ प्रहलाद पांडे उपस्थित थे। फूलपुर स्थित संगतजी गली के गुरुद्वारा में प्रकाशोत्सव मनाया गया। संयोजक भृगुनाथ ने कहा कि गुरु गोविन्द सिंह ने सिखो के पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब को पूरा किया। गुरु रूप में सुशोभित किया। गुरु गोविंद सिंह विश्व की बलिदानी परम्परा में अद्वितीय थे। महान लेखक, मौलिक चिंतक और संस्कृत सहित कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे।

शहर के पुरानी कोतवाली स्थत सरदार कटरे के गुरु द्वारे पर गरु गोविंद सिंह के प्रकाशोत्सव पर पूजा पा- फोटो : AZAMGARH

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