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Azamgarh News: बदरहुआ गेज पर लाल निशान के पार हुई सरयू, तटवर्ती गांवों में बढ़ीं मुश्किलें

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घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से बेलहिया ढाला से सोनौरा संपर्क मार्ग पूरी तरह पानी में डूबा, पानी स
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घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। महुला गढ़वल बांध के उत्तर में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कई गांवों के संपर्क मार्ग और लिंक मार्ग प्रभावित हो गए हैं।
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नदी डिघिया के बाद अब बदरहुआ में भी लाल निशान के पार हो गई है। टेकनपुर रेगुलेटर के खुले फाटक को बंद करने के लिए 24 घंटे से सिंचाई विभाग के कर्मचारी मशक्कत कर रहे हैं। जलस्तर बढ़ने से लगभग 1500 बच्चों की स्कूल आने-जाने में दिक्कतें बढ़ गई हैं और बीमारों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
चक्की, देवारा खास राजा, बांका, बूढ़न पट्टी, शाहडीह, सोनौरा, अजगरा, अचल नगर, इस्माइलपुर, नैनीजोर, अराजी नौबरार करखिया किता फर्स्ट और अराजी नौबरार करखिया किता सेकेंड जैसे गांव प्रभावित हुए हैं।
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महुला गढ़वल बांध खरैलिया ढाला से सोनौरा संपर्क मार्ग पर बच्चे नाव से साइकिल लेकर आते-जाते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
अजगरा, सोनौरा, अभन पट्टी, धुसवा, महाजी, झगरहवा, झनझनपुर और मानिकपुर के कक्षा एक से 12 तक के लगभग 1500 बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं। इसी तरह, बंधे के दक्षिण रौनापार में बीएसडी इंटर कॉलेज, तिलक इंटर कॉलेज, धीरज इंटर कॉलेज, एसआरएस इंटर कॉलेज, एलडी इंटर कॉलेज और जमुवारी रौनापार के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे भी प्रभावित हैं।
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स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमराईं
देवारा क्षेत्र के ग्रामीणों, विशेषकर बीमार बच्चों और बूढ़ों को अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सोनौरा देवारा की एक 1 वर्ष की बच्ची चार-पांच दिन से बीमार है। उसे लेकर बाढ़ चौकी जमुवारी में डॉक्टर नहीं मिला, जिसके बाद गंभीर हालत में उसे आजमगढ़ मुख्यालय करीब 60 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ा। बाढ़ के कारण बंधे से घर तक पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि नाव की उपलब्धता अनिश्चित है। नाव से उस पार जाने के बाद भी चार से पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। सविता, जो देवारा सोनौरा की निवासी हैं, अपनी पोती को दवा दिलाने चांद पट्टी गई थीं। उन्होंने बताया कि गांव में कई लोग बीमार हैं और बाढ़ चौकी पर दवा उपलब्ध नहीं है। रौनापार या चांद पट्टी जाकर दवा लेनी पड़ती है। संपर्क मार्ग डूब जाने के कारण नाव से उतरकर तीन-चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। उर्दिहा, मानिकपुर और सोनौरा में तीन नाव चलाई जा रही हैं।
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जिन विद्यालयों में बच्चे नाव से आ-जा रहे हैं, वहां के प्रबंधकों को तत्काल बच्चों के आने पर रोक लगानी चाहिए, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सभी बाढ़ चौकियों पर दवा उपलब्ध करा दी गई है और सभी को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं। जो कर्मचारी बाढ़ चौकी पर अनुपस्थित पाया जाएगा, उसके खिलाफ जिलाधिकारी को पत्र लिखा जाएगा। -संजीव कुमार राय, एसडीएम सगड़ी।

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जलस्तर की स्थिति
29 सितंबर को बदरहुआ नाले पर जलस्तर शाम चार बजे 71.68 मीटर था, जो मंगलवार को 42 सेमी बढ़कर 72.10 मीटर हो गया। डिघिया नाले पर जलस्तर 71.02 मीटर से 33 सेमी बढ़कर 71.35 मीटर हो गया। डिघिया नाले का जलस्तर न्यूनतम 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम 72.59 मीटर है। वहीं, बदरहुआ नाले पर न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम 73.52 मीटर है।
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