माहे रमजान पर तपिश पर आस्था भारी रही। भीषण गर्मी के बाद भी मुसलमानों ने जोशोखरोश के साथ पहला रोजा रखा। युवा और बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों में गजब का उत्साह रहा। रमजान के पहले दिन ही नगर की मस्जिदें नमाजियों से गुलजार रहीं। शाम को अजान होते ही लोगों ने बारगाहे इलाही में दुआओं के लिए हाथ उठा दिए और फिर खजूर और पानी से रोजा खोला। वहीं इशा की नमाज में तरावीह अदा की गई।
भोर में उठकर लोगों ने सहरी कर रोजा रखने की नीयत की। दिन बढ़ा तो तपिश अपना रंग दिखाने लगी लेकिन आस्था उस पर भारी पड़ी। रोजेदार तिलावत और इबादत में मशगूल रहे। लोगों ने अल्लाह की बारगाह में दुआ के लिए हाथ उठाए।
मगरिब की अजान होते ही लोगों ने खजूर और पानी से इफ्तार कर खुदा का शुक्रिया अदा किया। इससे पहले बाजारों में लोगों ने इफ्तार के सामान खरीदे। फलों और किराने की दूकानों पर लोगों की भीड़ रही। वहीं महिलाओं ने इफ्तारी के लिए दोपहर बाद से ही तैयारी शुरू कर दी थी।