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Azamgarh News: स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा, जिले से अब तक मिल चुके सात मरीज

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जिला अस्पताल में बिना मास्क के घूमते लोग। संवाद
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स्वाइन फ्लू के प्रकोप की आशंका के बीच अस्पताल में मरीजों और उनके तीमारदारों की प्रभावी स्क्रीनिंग नहीं हो रही है। ओपीडी से लेकर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) तक भीड़ लगी रहती है और कोई भी मास्क का इस्तेमाल नहीं कर रहा है।
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सामाजिक दूरी के नियमों का भी पालन नहीं हो रहा है, जिससे मरीजों के साथ-साथ चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों में भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1000 से अधिक मरीज पहुंचते हैं, जिनमें से लगभग ढाई से तीन सौ मरीज बुखार, खांसी, जुकाम और वायरल संक्रमण से पीड़ित होते हैं।
इसके बावजूद, अस्पताल में प्रवेश के समय लक्षणों की पहचान की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। इसके परिणामस्वरूप, सामान्य बीमारियों वाले और संक्रमण के लक्षण वाले मरीज एक ही भीड़ में शामिल हो जाते हैं।
ओटी क्षेत्र, जो संक्रमण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, वहां भी मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही अनियंत्रित है। अनावश्यक भीड़ और समूह में खड़े लोगों को नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था नजर नहीं आती। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में आवाजाही को सीमित करना अत्यंत आवश्यक है।
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जिले में स्वाइन फ्लू के सात मरीज अब तक मिल चुके हैं। सभी लोगों का इलाज वाराणसी में चल रहा है। इसके बाद भी जिले में लापरवाही बरकरार है।
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ओपीडी में मास्क का अभाव
सुबह ओपीडी शुरू होते ही पंजीकरण काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कक्षों तक मरीजों और तीमारदारों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई स्थानों पर लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े दिखाई देते हैं। भीड़ को व्यवस्थित करने और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजामों का अभाव है। बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार बिना मास्क के नजर आते हैं। जबकि चिकित्सक ओपीडी में मास्क लगाए लोगों का इलाज करते नजर आते हैं।
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मेडिकल कालेज में अभी तक नहीं हुई एक भी जांच
जिले में स्वाइन फ्लू की जांच की व्यवस्था सिर्फ मेडिकल कालेज में है। प्राचार्य डॉ. वीडी सिंह ने बताया कि अभी तक हमारे यहां मेडिकल कालेज में किसी भी मरीज के स्वाइन फ्लू की जांच नहीं हुई है। अगर कोई इसके लक्षण का मरीज आए तो उसकी स्क्रीनिंग कराई जाए।
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स्वाइन फ्लू के लक्षण
अचानक तेज बुखार या कंपकंपी महसूस होना।
सूखी खांसी और गले में खराश या दर्द।
मांसपेशियों में तेज दर्द, पूरे शरीर में ऐंठन और सिरदर्द।
अत्यधिक कमजोरी या सुस्ती महसूस होना।
नाक बहना या बंद होना, और कुछ मामलों में उल्टी या दस्त
सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, होंठ या चेहरा नीला पड़ना और लगातार चक्कर आना।
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स्वाइन फ्लू से बचाव
भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते समय या बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने पर फेस मास्क का उपयोग करें।
साबुन और पानी से बार-बार अपने हाथ धोएं या सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या टिशू पेपर से ढकें।
गंदे हाथों से अपनी आंखें, नाक या मुंह को छूने से बचें।
जो लोग बीमार हैं या जिन्हें फ्लू के लक्षण हैं, उनसे उचित दूरी बनाकर रखें।
संक्रमित होने पर खुद को अलग (आइसोलेट) कर लें ताकि यह दूसरों में न फैले।
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जिला अस्पताल में अब तक नहीं हुई कोई स्क्रीनिंग
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सतीश चंद कन्नौजिया ने बताया कि हमने अस्पताल में वार्ड तो बना रखा है, लेकिन अभी तक ऐसी स्थिति आई नहीं है। कोई भी ऐसा मरीज नहीं आया है कि उसकी स्क्रीनिंग की जरूरत पड़े।
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मिले मरीजों पर सीएमओ के तर्क
वाराणसी में चल रहे सात मरीजों के उपचार के बारे में पूछे जाने पर सीएमओ डॉ. एनआर वर्मा ने बताया कि जिन मरीजों को आजमगढ़ का बताया जा रहा है। उनके आधार कार्ड पर आजमगढ़ का एड्रेस है। इसलिए उन्हें आजमगढ़ का बताया जा रहा है लेकिन ये लोग आजमगढ़ से बाहर रहते हैं। ये लोग वहीं से पीड़ित हुए हैं।
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