जिला मुख्यालय गुरुवार को प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी से गूंजता रहा। विभिन्न वर्ग के लोगों ने जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर हक के लिए आवाज बुलंद की। कोई मानदेय का भुगतान न होने के विरोध में सड़क पर उतरा था तो कोई अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रहा था। सरकारी कर्मचारी का दर्ज न दिए जाने के खिलाफ रोजगार सेवक आंदोलन के मूड में दिखे।
फूलन सेना ने अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट स्थित मेहता पार्क में धरना दिया। कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। मुख्य अतिथि मुखदेव साहनी ने कहा कि मझवार जाति के पात्र व्यक्तियों को जाति प्रमाणपत्र निर्गत किए जाने का शासनादेश जारी है लेकिन उसमें मझवार जाति का पात्र व्यक्ति किसे माना जाए, यह दिशा-निर्देश और उपजातियों का उल्लेख न होने के कारण प्रदेश के समस्त तहसीलदार मझवार जाति का प्रमाणपत्र निर्गत नहीं कर रहे हैं। फूलन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल निषाद ने कहा कि जिस प्रकार पूर्व में गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में देश के कई प्रांतों में 20 अनुसूचित जातियों और 21 अनुसूचित जनजातियों की उपजातियों को लाभ देने का प्रदेश सरकारों को पत्र जारी किया गया। इसी प्रकार मझवार जाति की उपजातियों को लाभ दें, अन्यथा फूलन सेना जुलाई माह में लखनऊ में धरना देगी। अध्यक्षता श्यामबरन निषाद और संचालन वेदप्रकाश निषाद ने किया। इस मौके पर रामरूप, कमला, रामराज, जिलाजित, घुरहू, दयाराम, रमेश, राजू, मुन्नीलाल, रघुवीर निषाद, गुल्लू निषाद आदि उपस्थित हुए।
वहीं, कुंवर सिंह उद्यान में गुरुवार को ग्राम रोजगार सेवकों की बैठक हुई। इसमें ग्राम रोजगार सेवकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा न दिए जाने पर रोष जताया गया। साथ ही छह जुलाई को लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री का आवास घेरने का निर्णय लिया गया। जिलाध्यक्ष सच्चेलाल यादव ने कहा कि विगत नौ वर्षों से संविदा पर कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों को विनियमित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग की जा रही है। प्रदेश सरकार ने तीन दिसंबर 2014 तक ग्राम रोजगार सेवकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने का आश्वासन दिया था लेकिन सरकार वादा पूरा नहीं कर सकी। विरोध में एक जून को लक्ष्मण मेला मैदान में आमरण अनशन भी किया गया। बावजूद सरकार कोई निर्णय नहीं ले सकी। मीडिया प्रभारी राकेश यादव ने कहा कि समिति ने छह जुलाई को मुख्यमंत्री के आवास का घेराव करने का निर्णय लिया है। बाद में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संबोधित चार सूत्री मांगों का ज्ञापन उपजिलाधिकारी सदर को सौंपा गया। बैठक में जिला उपाध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप सिंह, जिला महामंत्री इंदल आदि ग्राम रोजगार सेवक मौजूद थे। दूसरी ओर, बालश्रम विद्यालयों के कर्मचारियों और शिक्षकों का विकास भवन गेट पर धरना चौथे दिन भी जारी रहा। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रामप्यारे यादव ने धरने का समर्थन किया। तत्कालीन प्रभारी बालश्रम परियोजना जिला विकास अधिकारी के मांग पत्र पर ही भारत सरकार श्रम मंत्रालय ने बालश्रम कर्मचारियों के मानदेय के भुगतान के लिए एक करोड़ 17 लाख 55 हजार रुपये 31 मार्च 2015 को ही मिल गया लेकिन ज भुगतान रुका है। चंद्रिका प्रसाद और अतुल कुमार ने कहा कि मात्र आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। धरने को राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रामजन्म प्रसाद रावत, महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय कुमार यादव आदि ने संबोधित किया।