सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड ने कहा कि धर्म एवं मजहब लोगों की पहचान है। इसे राजनीति से न जोड़ा जाए। इन्हें राजनीति से जोड़ने पर लोगों को बराबरी का दर्जा नहीं मिल सकता है। वह अंबारी स्थित प्राथमिक विद्यालय में गुरुवार को लगातार बढ़ती सांप्रदायिकता पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि गांधी जी के हत्यारे नाथूराम का संबंध आरएसएस से था। हत्या से पहले भी गांधी जी पर पांच बार हमले हो चुके थे। इसमें से तीन बार नाथूराम शामिल रहा। गांधीजी का सपना देश को धर्मनिरपेक्ष बनाने का रहा। जिसे ब्राह्मणवाद पचा नहीं पा रहा था। आरएसएस द्वारा लगातार संविधान को बदलने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन देश के ढांचे को बदलने का प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कैराना में आरएसएस द्वारा बेबुनियाद साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि केंद्र की सरकार खून-खराबे के बल पर यूपी में चुनाव जीतना चाह रही है। व्हाट्सएप को बंद कर चौराहों पर देखने का समय आ गया है। डा. लेनिन रघुवंशी ने हिंदू धर्म एवं सनातन धर्म पर विस्तार से चर्चा की। कहा कि आरएसएस की लड़ाई सनातन धर्म से है। आरएसएस का भारतीय संविधान पर भरोसा नहीं है। मुनीजा रफीक खान ने कहा कि सांप्रदायिकता से लड़ने के लिए खुद पर भरोसा होना चाहिए। हमें अपने अंदर झांकने की जरूरत है। हिंदू राष्ट्र के नाम पर देश में एक बड़ी साजिश चल रही है।
डा. सरिता भारद्वाज ने कहा कि बड़ी एजेंसिया देश के लोगों को भटकाकर बांटने की काम कर रहीं है। अध्यक्षता डा. नंद किशोर यादव एवं संचालन डा. उदयभान यादव ने किया। मौके पर वीरेंद्र यादव, राजेश यादव, डा. सुभाष यादव, रामअजोर यादव, रामाश्रय यादव, डा. रहबर, पूर्व विधायक हाफिज इरसाद, विक्रम, विवेक, मजरूल हक, पारसानाथ यादव, रामधनी मौजूद रहे।