अतरौलिया। चिस्तीपुर गांव स्थित कौलेश्वर धाम (कैलीस्थान) में चल रहे श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ के छठवें दिन वृंदावन मथुरा से पधारे व्यास पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज जी ने श्री राम विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। यज्ञकर्म की परिभाषित करते हुए कहा कि विवेक से जीना यज्ञ कर्म के बराबर है।
उन्होंने कहा कि अतिथि को भोजन कराकर जो खाता है वह यज्ञ कर रहा है। जो सब कुछ होते हुए जमीन पर सोए वही स्वामी है। उन्होंने सीख दी की जानकार बनकर सुनने की न सोचना, वरना आनंद नहीं उठा पाओगे। उसके बाद व्यास जी ने धनुष यज्ञ, परशुराम-लक्ष्मण संवाद एवं श्री राम सीता विवाह का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान कण-कण में विराजमान हैं। अगर हम समाज में दीन दुखियों जरूरत मंदों की सेवा करते हैं तो समझो भगवान की सेवा कर रहे हैं। कथा के समापन पर श्रीराम की आरती उतारी गई। इस मौके पर अनिल कुमार जायसवाल, शेषनाथ वर्मा, अरविंद कुमार वर्मा, नवनीत जायसवाल, रामरूप सोनी, अशोक कुमार देव, अजीत कुमार सिंह, प्रदीप जायसवाल, रजत कुमार गुप्ता आदि उपस्थित थे।