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सरकारी आवास को उठाया किराए पर और घर से कर रहे आवागमन

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आजमगढ़। सरकारी अस्पतालों में कर्मचारी मौजूद रहे ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जा सके इसके लिए अस्पतालों में आवासों का निर्माण कराया गया है। लेकिन कर्मचारी आवास का आवंटन होने के बाद भी आवंटित आवासों में नहीं रहते हैं। मंडलीय अस्पताल में तैनात कई कर्मचारियों ने तो अपने आवास को किराए पर उठा रखा है और वह दूसरी जगह रहते हैं।
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मंडलीय अस्पताल में चिकित्सकों और उसमें कार्य करने वाले चतुर्थ श्रेणी के रहने के लिए आवास का निर्माण कराया गया। इन कर्मचारियों को आवास का आवंटन भी किया गया है। बहुत से कर्मचारी इन आवासों में रहते भी है। लेकिन कुछ कर्मचारी ऐसे हैं जिन्होंने आवास का आवंटन तो करा लिया लेकिन वह उनमें रहते नहीं है। उनके द्वारा आवंटित आवास को किराए पर उठा दिया गया है। मंडलीय अस्पताल में ऐसे तीन कर्मचारी हैं जिनके नाम पर आवास का आवंटन है लेकिन वह लोग इन आवासों में रहने की बजाए दूसरी जगहों पर रहते हैं। इनमें चतुर्थ श्रेणी के कुछ कर्मचारी शामिल हैं। इन लोगों ने आवंटित आवास को किराए पर उठाया है।
आवंटन किसी का और रहता है कोई
आजमगढ़। मंडलीय अस्पताल में तैनात लैब टेक्निशियन के नाम पर आवास का आवंटन कराया है। वर्तमान में उक्त कर्मचारी ने अपना खुद का निजी मकान बनवा लिया है। जिसके कारण वह उक्त आवास में नहीं रहता है। उसके स्थान पर सेवानिवृत्त हुए फार्मासिस्ट रहते हैं। जबकि नियमानुसार अगर किसी कर्मचारी का निजी आवास यदि 10 किमी परीधि के अंदर है तो उसे आवास का आवंटन नहीं हो सकता है। जिस कर्मचारी के नाम पर उक्त आवास का आवंटन है उसका शहर के नजदीक खुद का निजी भवन में है। ऐसे में उसे आवास का आवंटन होना और दूसरे का उस आवास में रहना अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। इस मामले में मंडलीय अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अनूप कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल परिसर में कई कर्मचारियों ने आवास का आवंटन अपने नाम पर कराकर उसे किराए पर उठा रखा है। जिसे खाली कराने के लिए जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
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