संगीत नाटक अकादमी और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से बुधवार को अपराह्न करीब दो बजे जजी मैदान में लोक महोत्सव देशज का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन निजामाबाद गुरुद्वारे के ऐतिहासिक नगाड़े को जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और नाटक अकादमी के सचिव ने बजाकर किया।
इसके बाद मंच पर दीप प्रज्जवलित किया गया।
इसके तुरंत बाद जिले के स्थानीय कलाकार मुन्ना और मटरू पहलवान ने पवरिया नृत्य और गायन प्रस्तुति की, इसके बाद फैजाबाद के शीतला प्रसाद एवं गोरखपुर के छेदी यादव और उनके साथियों ने जंघिया नृत्य प्रस्तुत किया। इसी क्रम में जिले के उमेश कन्नौजिया और गाजीपुर के जीवन राम की टीम ने धोबिया नृत्य प्रस्तुत किया। साथ ही वाराणसी के मन्नू यादव साथियों के साथ पूर्वांचल की थाती का मशहूर बिरहा की प्रस्तुति की गई।
इससे पहले जिलधिकारी सुहास एलवाई ने मंच से कार्यक्रम को सराहा। अकादमी के सहयोग से एक मंच पर जिले के लोगों को देश की विविधता देखने को मिलेगी। बोले, आजमगढ़ चंद्रमा ऋषि, दुर्वासा, हरिऔध, राहुल सांकृत्यायन, कैफी आजमी, अल्लामा शिब्ली नोमानी की धरती है। एसपी दयानंद मिश्र ने कहा कि देशज के माध्यम से विलुप्त हुई कलाएं फिर से आजमगढ़ में जीवंत होगी। डीडीसी ऋतु सुहास ने भी संबोधित किया।
जिले के शहनाई वादक छन्नू चंद भाई ने साथियों के साथ शहनाई बजाकर दिल जीत लिया। मौके पर नाटक अकादमी के सचिव सुमन कुमार, नंदा देवी, राम दयाल शर्मा, आलम भाई, जफर, आदि मौजूद थे। उधर, देर रात लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने 'रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे' सुनाकर महिला वियोग को उकेरा। उन्होंने कहा कि यूपी और बिहार की महिलाओं के त्याग से ही साइनिंग इंडिया का नारा सार्थक हुआ है।