आजमगढ़। नगर पालिका की ओर से जिन स्थानों पर दुकानों का निर्माण किया जा रहा था, उसमें सबसे बड़ी बात ये सामने आई थी कि जिस जमीन पर दुकानों का निर्माण किया जा रहा था वो उसकी जमीन ही नहीं थी। रोडवेज पर जिस जमीन को पालिका अपना बता रही थी, रोडवेज उस पर अपना दावा ठोक रहा था। वहीं, स्टेडियम के पास जहां दुकानों का निर्माण हो रहा था वो पीडब्ल्यूडी की जमीन थी। इन जमीनों को पालिका ने अपना तो बताया, लेकिन पालिका ये इसे दावे की पुष्टि के लिए उसका संपत्ति रजिस्टर मांगा गया तो उसे पेश ही नहीं कर पाई। डीएम ने इसे लेकर सख्त नाराजगी जताई है। नगर पालिका को इसके लिए नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर संपत्ति रजिस्टर तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा है।
नगर पालिका के संपत्ति रजिस्टर में उसकी सभी संपत्तियों का ब्यौरा दर्ज होता है। इसमें नगर पालिका की भूमि, पोखरी, मकान, दुकान सभी का ब्यौरा दर्ज होता है। ऐसे में पालिका का संपत्ति रजिस्टर गायब होने या इसके आज तक नहीं बनने से पालिका की संपत्तियों को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। जब पालिका को यही पता नहीं है कि उसकी कौन सी संपत्ति है और कहां है तो उसकी सुरक्षा कैसे होगी। अवैध रूप से दुकानों के निर्माण के प्रकरण में पालिका से कई बार संपत्ति रजिस्टर मांगा गया, लेकिन वो पेश नहीं कर पाई। यहां तक की सीआरओ हरिशंकर ने पालिका में स्वयं इसकी जांच करने गए थे, लेकिन संपत्ति रजिस्टर का पता नहीं चला था। मामले की जानकारी डीएम के पास पहुंचने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई है। पालिका को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर संपत्ति रजिस्टर पेश करने के निर्देश दिए है।
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पालिका संपत्ति रजिस्टर गायब नहीं है। उर्दू में हैं। अभी हम लोग इसके बारे में समझ नहीं पाए हैं। समझकर जल्द ही जिलाधिकारी के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
शुभनाथ प्रसाद, ईओ