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सीओ सिटी के गनर को पेट में मारी थी गोली

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ब्यूरो की खबर के साथ फोटो-इमरान लखनऊ के विभूति खंड में एमिटी स्कूल के पास एसटीएफ से मुठभेड़ में म? - फोटो : LUCKNOW
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आजमगढ़। लखनऊ में हुई मुठभेड़ में ढेर निजामाबाद कस्बा निवासी सचिन पांडेय 18 सितंबर 2013 की रात शहर के हर्रा की चुंगी मुहल्ले में तत्कालीन सीओसिटी रहे शैलेष पांडेय के गनर रजनीश सिंह को गोली मारने के बाद सुर्खियों में आया। इसके नाम का सिक्का चलने लगा था। गोली से घायल सिपाही का छह साल बाद भी इलाज चल रहा। हालत में अभी पूरी तरह से सुधार नहीं हो पाया है। इस मामले की कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान गवाहों के मुकर जाने से सचिन मुकदमे से बरी हो गया था।
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निजामाबाद कस्बा निवासी सचिन पांडेय एक बहन और तीन भाईयों में बड़ा था। उसके पिता दिनेश पांडेय आर्मी से रिटायर हैं। साल 2011, 12 में सचिन छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम देते हुए अपनी अच्छीखासी गैंग खड़ा कर लिया था। वर्तमान समय में उसके गिरोह में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल थे। जरायम की दुनिया में कदम रखते ही सचिन ने कोहराम मचा दिया था। गिरोह के सदस्य घटनाओं में पल्सर और अपाचे बाइक का प्रयोग कर रहे थे। जबकि पुलिस आपराधिक वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाए हुए थे। इसीक्रम में तत्कालीन सीओसिटी शैलेष पांडेय 18 सितंबर 2013 की रात शहर में गश्त कर रहे थे। हर्रा की चुंगी मुहल्ले में पल्सर सवार दो युवक खड़े थे। देर रात को पल्सर सवार युवकों को खड़ा देख सीओसिटी ने हमराही रजनीश सिंह से पूछने को कहे। जैसे ही सिपाही बदमाशों के पास पहुंचा कि दोनों भागने लगे। इस दौरान सचिन पैदल भागा, जबकि उसका साथी शहर के बागेश्वर नगर मुहल्ला निवासी वैभव यादव उर्फ छोटू पल्सर से। सचिन के भागने पर सिपाही ने उसे दौड़ा लिया। इस दौरान सचिन ने सिपाही रजनीश पर गोली चला दी और पेट में गोली लगने से वह घायल हो गया। इस घटना के बाद सचिन का नाम चर्चा में आया। 27 जनवरी 2015 को पुलिस सचिन पांडेय का गैंग रिकार्ड में दर्ज की। उसके गैंग का नंबर डी- 16 थी। इसमें सचिन सरगना और शेष उसके एक दर्जन से अधिक सदस्यों का नाम शामिल है। सीओ के हमराही को गोली मारने के मामले में गवाहों के मुकर जाने पर वह केस से बरी हो गया था, लेकिन अन्य मामले में जेल में निरुद्ध था। वह 15 जुलाई 2019 को कानपुर देहात जेल से जमानत पर छूटा था। काफी दिनों तक जेल में रहने की वजह से उसे रुपयों की आवश्यकता थी। अधिक से अधिक रुपये इकट्ठा करने के लिए पुन: अपराध में सक्रिय हो गया था, लेकिन रविवार को लखनऊ में उसके पाप का अंत हो गया।
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