जमानत के समय रामजीत यादव जेल के सरकारी खाते की केनरा बैंक की चेक बुक जिसका संचालन जेल अधीक्षक द्वारा किया जाता है, को चुरा लिया। जेल से रिहा होने के अगले ही दिन 21 मई 2024 को उसने जेल के खाते से 10 हजार रुपये निकाल लिए।
इसके बाद 22 मई को दोबारा फिर से 50 हजार निकाले। चार दिन बाद फिर से 140000 रुपये उसने बैंक से निकाला। वह पैसा निकालता रहा और जेल के अधिकारियों व कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
जब 22 सितंबर 2025 को उसने बैंक के खाते से दो लाख 60 हजार रुपये निकाले तो जेल अधीक्षक आदित्य कुमार सिंह को इसकी जानकारी हुई। जेल अधीक्षक ने कारागार में तैनात वरिष्ठ लेखा प्रभारी मुशीर अहमद से इसकी जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि इतना पैसा नहीं निकाला गया।
इसके बाद जेल प्रशासन के अधिकारियों ने बैंक पहुंचकर जब स्टेटमेंट निकलवाया तो पता चला कि जेल से रिहा हुआ कैदी रामजीत यादव अपने को जेल का ठेकेदार बताकर लगातार केनरा बैंक के खाते से जेल अधीक्षक का फर्जी दस्तखस्त बनाकर पैसे निकालता रहा।
मामले का खुलासा होने के बाद जेल अधीक्षक आदित्य कुमार सिंह ने आजमगढ़ कोतवाली में चार आरोपियों रामजीत यादव उर्फ संजय, शिव शंकर उर्फ गोरख पिता लालजीत यादव, वरिष्ठ सहायक मुशीर अहमद और जेल के चौकीदार अवधेश कुमार पांडेय के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामले में मुकदमा दर्ज कर पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है।