आजमगढ़। रमजान के पहले जुमे की नमाज को लेकर मुस्लिम बंधुओं में काफी उत्सुकता होती है। लॉक डाउन के चलते इस बार मस्जिदों में सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने पर रोक है। इस वजह से जुमे की नमाज मुस्लिम समुदाय के लोगों ने घर पर ही अदा की।
पाक रमजान मुस्लिम समुदाय के लिए सबसे पवित्र महीना होता है। इस माह में प्रत्येक दिन रोजेदार पांचों वक्त की नमाज के साथ ही तरावीह की नमाज भी पढ़ता है। वहीं जुमे की नमाज का अपना अलग महत्व सामान्य दिनों में ही रहता है तो रमजान माह में इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस शुक्रवार को रमजान माह का पहला जुमा था। रमजान माह की शुरूआत के पूर्व ही मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सभी नमाज घरों में ही पढ़ने और कोरोना संक्रमण को देखते हुए शासन से जारी एडवाइजरी का पूर्ण पालन करने का अनुरूप मुस्लिम समुदाय के लोगों से किया था। मुस्लिम धर्मगुरुओं की अपील का असर भी देखने को मिल रहा है। मुस्लिम समुदाय के लोग घरों पर ही नमाज अदा कर रहे हैं। रमजान के पहले जुमे को भी लोगों ने घरों के अंदर ही जुमे की नमाज पढ़ा और इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी अनुपालन किया गया।
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मस्जिदों के पास रही चौकसी
आजमगढ़। जुमे की नमाज सामान्य दिनों में ज्यादातर लोग जामा मस्जिद में ही पढ़ते है। इसके अलावा अन्य मस्जिदों में भी जुमे की नमाज होती है। कोरोन संक्रमण के चलते मस्जिदों के दरवाजे बंद है और सामुहिक रूप से नमाज आदि पढ़ने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। शुक्रवार को रमजान माह के पहले जुमे की नमाज थी, हालांकि मुस्लिम समुदाय के लोग पहले से ही शासन से जारी एडवाइजरी का अनुपालन करते हुए घर पर ही नमाज पढ़ रहे है। इसके बाद भी पुलिस महकमा जुमे की नमाज को देखते हुए अलर्ट पर नजर आया। जामा मस्जिद के अलावा अन्य मस्जिदों के आसपास कड़ी चौकसी का इंतजाम किया गया था।