आजमगढ़। सरकार और प्रशासन के निर्देश के बाद भी गौशालाओं में बंद पशुओं के लिए पराली जमा कराने में बीडीओ और ग्राम प्रधान रूचि नहीं ले रहे हैं। किसान पराली देने को तैयार हैं लेकिन उसे लेने वालों का पता नहीं है। अब तक जनपद में सिर्फ 660 क्विंटल पराली ही जमा की जा सकी है।
सरकार ने पराली जलाने पर रोक लगाए जाने के लिए एक तरीका निकाला। उसने किसानों के खेतों से पराली जमा कर गौशालाओं में भेजने का निर्देश दिया। इसकी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान, सचिव और बीडीओ को सौंपी गई। इस कार्य में आने वाले खर्च को मनरेगा से भुगतान करना था लेकिन ग्राम प्रधान, सचिव और बीडीओ इस कार्य के प्रति लापरवाह हैं। जिसका परिणाम है कि आए दिन किसान खेतों में पराली जला रहे हैं और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ जुर्माना भी वसूला जा रहा है। इनकी लापरवाही के चलते जनपद में अब तक मात्र 660 क्विंटल पराली ही गौशालाओं में पहुंच पाई है।
पराली देने को किसान तैयार, लेने नहीं पहुंच रहा कोई
आजमगढ़। बहुत से किसान धान की कटाई का कार्य कर चुके हैं। अब उन्हें अपने खाली हुए खेत में गेहूं की बुआई करनी है। लेकिन खेत में पराली होने के कारण वह बुआई नहीं कर पा रहे हैं। बहुत से किसानों ने खेत में पराली की जुताई कराकर उसे पानी भर दिया है। ताकि वह सड़ जाए। वहीं बहुत से किसान पराली को एक जगह इकठ्ठा कर रहे हैं। किसान भी चाहते हैं कि कोई जल्द से जल्द से पराली उठा ले ताकि वह अपने खेत में गेहूं की बुआई कर सकें लेकिन कोई पराली लेने उनके पास नहीं पहुंच रहा है।
ग्राम प्रधान, सचिव और बीडीओ को पराली गौशाला तक भेजने घकी जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन यह लोग अपने कार्यों में रूचि नहीं ले रहे हैं। जिसके कारण गौशालाओं में पर्याप्त पराली नहीं पहुंच पा रही है। अब तक कुल 660 कुंतल पराली ही जमा हो सकी है। - वीके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
जिसमें सबसे ज्यादा 90 कुंतल पराली कोयलसा ब्लाक में, 80 कुंतल पराली मार्टीनगंज और बिलरियागंज, 60 कुंतल मेंहनगर और जहानागंज में 30 कुंतल पराली जमा हुई है। शेष ब्लाकों में से किसी में 10 तो किसी में 15 कुंतल ही पराली जमा हो सकी है।