बटला इनकाउंटर कांड से बदनामी का दंश सहने वाला जिले का संजरपुर
गांव अब आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन के सांसद असदुद्दीन ओवैसी
द्वारा उसे गोद लेने के बयान के बाद चर्चा में है।
राजनीतिक हलकों में इसे
लेकर भले तूफान मचा हो पर संजरपुर के लोगों का मानना है कि जिस जिले के 90
फीसद लोग हैदराबाद के सांसद का नाम तक नहीं जानते,
उसके एक गांव को गोद
लेने के पीछे निश्चित रूप से सांसद का कोई राजनीतिक स्वार्थ है। गांव के
लोगों का कहना है कि ओवैसी अगर हमारे गांव को गोद लेते हैं तो हमारी
दुश्वारियां बढ़ जाएंगी।
क्योंकि तब इस गांव की पहचान उसे गोद लेने वाले
सांसद की छवि से होने लगेंगी। और ओवैसी की जो छवि है, उससे हमारी दिक्कतें
बढ़नी लाजिमी हैं।
संजरपुर के निवासी और समाजसेवी मसयुद्दीन संजरी ने
कहा कि यहां के मुसलमानों का हैदराबाद से कोई ताल्लुक नहीं है। ओवैसी भी
कभी यहां आए नहीं।
हमारे जिले के 90 फीसद लोग हैदराबाद के सांसद का नाम तक
नहीं जानते। ऐसे में जिले के एक गांव को गोद लेने के पीछे निश्चित रूप से
सांसद का कोई राजनीतिक स्वार्थ है।
ओवैसी अगर संजरपुर गांव को गोद लेते हैं
तो हमारी दिक्कतें कम होने के बजाय बढ़ेंगी क्योंकि तब गांव की पहचान उसे
गोद लेने वाले सांसद की छवि से होने लगेंगी। ओवैसी की जो छवि है, उससे
हमारी दिक्कतें बढ़ेंगी।
मसयुद्दीन संजरी से मिलती-जुलती ही राय दूसरे
लोगों की भी है। गांव के युवा तारिक शफीक ने कहा कि हमें सच्चे हमदर्द की
दरकार है, जो हमारे ऊपर लगे बदनुमा दाग से हमें निजात दिला सके।
लेकिन
ओवैसी की नीयत ठीक नहीं है। उनका बयान राजनीति से प्रेरित है। गांव निवासी
रामकृष्ण गुप्ता कहना है कि यहां रहने वाले लोगाें को बुनियादी विकास की
दरकार है। हमें ऐसा हमदर्द चाहिए जो हमें बेगुनाह साबित करने में सहायता
करे। उनका कहना है कि ओवैसी सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं।
बटला इनकाउंटर के बाद से चर्चा में
19
सितंबर, 2008 को दिल्ली के बटला हाउस मुठभेड़ कांड के बाद संजरपुर गांव
विश्व पटल पर चर्चा में आया था। बटला हाउस मुठभेड़ में दिल्ली के सीरियल
ब्लास्ट मामले में वांछितों से पुलिस की मुठभेड़ हुई थी
जिसमें दिल्ली
पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा शहीद हो गई थे। इसमें दो वांछित भी
(आतिफ और साजिद) मारे गए थे, जो संजरपुर के निवासी थे। इस मामले में आतिफ
और साजिद के साथ-साथ गांव के 11 युवा आरोपी बने थे। इसमें तीन गिरफ्तार और
छह फरार हैं।
53 फीसदी आबादी मुसलमान
संजरपुर गांव की
कुल आबादी लगभग दस हजार है। यहां वोटरों की संख्या 5200 है। इसमें 47 फीसदी
मुसलिम और 53 फीसदी हिंदू बिरादरी है। यहां के लोग नौकरी कम करते हैं।
ज्यादातर छोटे-मोटे कारोबारी या मजदूर हैं।
कुछ विदेश में भी रहकर कमाते
हैं। दूसरे गांवों की तरह यहां के लोगों को भी नाली, खड़ंजा, बिजली और
जीविका के साधनों जैसी मूलभूत चीजों की दरकार है।
ओबैसी के विरुद्ध बयानों की निंदा की
अंबारी
(आजमगढ़)। आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन पार्टी की बैठक बुधवार को
माहुल स्थित कार्यालय पर हुई। जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
असदुद्दीन ओबैसी के खिलाफ राजनैतिक दलों द्वारा दिए जाने वाले बयानों की
निंदा की गई।
पार्टी के प्रदेश संयोजक शौकत अली ने कहा कि हमारे
राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बीबीसी पर आजमगढ़ जिले के एक
गांव को गोद लेने की इच्छा जाहिर की,
तो तमाम राजनैतिक दलों को अपना मुसलिम
वोट बैंक खिसकता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के वोटों से
सत्ता सुख भोगने की लालसा पालने वाले लोग अनर्गल बयान दे रहे हैं।
जो
सियासी और गैर सियासी संगठन हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष पर कीचड़ उछाल रहे
हैं, वे अपने अंदर झांक कर देखें। इस मौके पर अजीम अहमद, मो. आरिफ, अशफाक
खां, शशिकांत पांडेय आदि उपस्थित थे।