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Azamgarh News: लावारिस शवों के वारिस तक नहीं पहुंच पा रही पुलिस, 34 शवों के अपनों का अब भी इंतजार

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आजमगढ़। जिले में मिलने वाले लावारिस शव पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि बीते पांच वर्षों में मिले 36 लावारिस शवों में से 34 की अब तक शिनाख्त नहीं हो सकी है। ऐसे में इन शवों के वारिसों तक पुलिस नहीं पहुंच पा रही है और कई मामलों की जांच भी अधर में लटक जाती है। ऐसे में न केवल मृतकों की पहचान अधूरी रह जाती है बल्कि कई घटनाओं के पीछे का रहस्य भी खुल नहीं पाता।
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आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 तक जिले में कुल 36 लावारिस शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। इनमें नदी, नाला, नहर, रेलवे ट्रैक, चौराहों और झाड़ियों में मिले शवों के साथ ही सड़क हादसों में घायल होकर दम तोड़ने वाले, बीमारी से मरने वाले और मानसिक रूप से बीमार लोगों के शव भी शामिल हैं। सूचना मिलने पर पुलिस ऐसे शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजती है और पहचान के प्रयास करती है। यदि 72 घंटे के भीतर शिनाख्त नहीं हो पाती तो शव की फोटो खींचकर अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। पुलिस के अनुसार गंभीर मामलों में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले डीएनए के लिए सैंपल सुरक्षित रखा जाता है, ताकि भविष्य में पहचान संभव हो सके। हालांकि कई बार शव काफी पुराने या खराब स्थिति में मिलने के कारण शिनाख्त करना मुश्किल हो जाता है।
2023 में सबसे अधिक मिले अज्ञात शव, पहचान कर पाना बना बड़ी चुनौती
आजमगढ़। वर्ष 2021 से 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 में सबसे अधिक अज्ञात शव मिले थे। इसके बावजूद अधिकांश मामलों में शवों की पहचान नहीं हो सकी, जिससे कई घटनाओं के रहस्य भी अनसुलझे रह गए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक मामले वर्ष 2023 में सामने आए, जब 12 पुरुष और सात महिलाओं सहित कुल 19 अज्ञात शव मिले। हालांकि इनमें से केवल दो शवों की ही पहचान हो सकी।
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सोशल मीडिया बन सकता है सहारा
आजमगढ़। लावारिस शवों की पहचान के लिए पुलिस को कई बार सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ता है। विभागीय निर्देशों के अनुसार शव की फोटो और विवरण पोर्टल के माध्यम से आसपास के जिलों और राज्यों तक भेजा जाता है। बावजूद इसके कई मामलों में पहचान नहीं हो पाती। कई बार मानसिक रूप से बीमार लोगों की पहचान होने के बाद भी परिजन शव लेने नहीं आते, जिससे अंतिम संस्कार पुलिस को ही कराना पड़ता है।
अंतिम संस्कार के लिए मिलते हैं 3400 रुपये
आजमगढ़। लावारिस शवों के कफन-दफन या अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी पुलिस पर ही होती है। इसके लिए पुलिस को 3400 रुपये की राशि मिलती है, लेकिन यह रकम कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मिल पाती है। कई बार लकड़ी और वाहन के बिल जुटाने जैसी प्रक्रियाएं जटिल होने के कारण पुलिसकर्मी आवेदन तक नहीं कर पाते।
पुलिस अपनाती है यह प्रक्रिया
आजमगढ़। अज्ञात शव मिलने पर थाने की रोजनामचा में सूचना दर्ज की जाती है और थाना प्रभारी घटनास्थल पर पहुंचकर फॉरेंसिक टीम से साक्ष्य एकत्र कराते हैं। शव के कपड़ों, कागजात, टैटू, निशान और चोट के चिन्हों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके बाद शव की फोटो और विवरण डीसीआरबी व त्रिनेत्र पोर्टल के माध्यम से अन्य जिलों और सीमावर्ती राज्यों के थानों को भेजा जाता है, ताकि पहचान हो सके।
अज्ञात शव मिलने के वर्षवार आंकड़े (2021 ये 2025)
2021 : पुरुष 2, महिला 1 – शिनाख्त 0
2022 : पुरुष 4, महिला 1 – शिनाख्त 0
2023 : पुरुष 12, महिला 7 – शिनाख्त 2
2024 : पुरुष 4, महिला 2 – शिनाख्त 0
2025 : पुरुष 1, महिला 2 – शिनाख्त 0
अज्ञात शव मिलने के मामलों में पुलिस द्वारा शिनाख्त कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जाता है। शव मिलने के बाद उसकी फोटो और विवरण डीसीआरबी के माध्यम से आसपास के जिलों और सीमावर्ती राज्यों तक भेजा जाता है। इसके साथ ही सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जाता है, ताकि पहचान हो सके। यदि 72 घंटे के भीतर शव की शिनाख्त नहीं हो पाती है तो विधिक प्रक्रिया पूरी कर अंतिम संस्कार कराया जाता है।- चिराग जैन, एसपी ग्रामीण आजमगढ़।
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