परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को नियमित रूप से पूर्ण ड्रेस में आने के लिए प्रोत्साहित करने की कवायद शुरू हो गई है। अब विद्यालय में सबसे अधिक दिनों तक पूरी यूनिफॉर्म में आने वाले छात्र-छात्राओं की फोटो फ्लैक्स पर प्रिंट कराकर कक्षा के बाहर लगाई जाएगी।
इसके पीछे उद्देश्य अन्य बच्चों को भी नियमित रूप से ड्रेस पहनकर विद्यालय आने के लिए प्रेरित करना है। जिले में 2,706 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा और विद्यालय में अच्छा माहौल उपलब्ध कराने के लिए विभाग की ओर से विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।
बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और उनके पोषण के लिए मध्याह्न भोजन योजना संचालित की जा रही है। वहीं पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए निशुल्क किताबें भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
शासन की ओर से छात्र-छात्राओं को ड्रेस, बैग, जूता-मोजा और स्वेटर के लिए डीबीटी के माध्यम से 1200 रुपये प्रति छात्र की धनराशि अभिभावकों के खाते में भेजी जाती है। इसका उद्देश्य बच्चों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें प्रतिदिन पूर्ण ड्रेस में विद्यालय आने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इसके बावजूद कई बच्चे बिना ड्रेस के ही विद्यालय पहुंच रहे हैं। इसी को देखते हुए अब विभाग की ओर से नई पहल की जा रही है। इसके तहत कक्षा में नियमित रूप से पूर्ण यूनिफॉर्म में आने वाले बच्चों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
जो छात्र-छात्राएं सबसे अधिक दिनों तक पूरी ड्रेस में विद्यालय आएंगे, उनकी फोटो खींचकर फ्लैक्स पर प्रिंट कराई जाएगी। इसके बाद फोटो को संबंधित कक्षा के बाहर लगाया जाएगा।
बीएसए राजीव कुमार पाठक ने बताया कि कक्षा के बाहर अपने साथियों की ड्रेस में फोटो देखकर अन्य बच्चों में भी नियमित रूप से यूनिफॉर्म पहनकर विद्यालय आने की इच्छा बढ़ेगी। इससे बच्चों में अनुशासन और विद्यालय के प्रति जुड़ाव बढ़ने के साथ ही ड्रेस में आने की आदत को भी बढ़ावा मिलेगा।