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दो माह में एक साल की दवा खा गए जिले के लोग

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कोरोना काल में सहमे लोगों ने मामूली परेशानी होने पर कोरोना से बचाव के लिए दवाएं खरीदीं। मार्च में उभरा कोरोना संक्रमण अप्रैल में चरम पर था। हर कोई डरा और सहमा हुआ था। नतीजा यह रहा कि एक साल में जितनी दवाओं की खपत होती थी उतनी दवाएं लोगों ने दो माह में ही खरीद डालीं। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों से भी दवाओं का वितरण किया गया। जनपद में पैरासिटामोल की टैबलेट की 50 लाख से अधिक गोलियां बिक गईं। कोरोना में प्रयुक्त होने वाली अन्य दवाओं की भी खूब बिक्री हुई।
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कोरोना का संक्रमण जब चरम पर था तो उस समय सभी के सामने चिकित्सकीय सुविधाओं का संकट खड़ा हो गया था। कोरोना में प्रयोग आने वाली दवाओं की कालाबाजारी भी खूब हुई। सोशल मीडिया पर जिन दवाओं का पर्चा घूमता या चिकित्सकों द्वारा सलाह का पर्चा आता लोग उसे लेकर मेडिकल स्टोर पर पहुंचते और पूरे परिवार के लिए दवाओं की खरीद करते। इसका परिणाम हुआ कि कई दवाओं की किल्लत भी होने लगी थी। सर्वाधिक बिकने वाली दवाओं में वे हैं जो आमतौर पर सर्दी जुखाम, बुखार, वायरल, फ्लू और निमोनिया होने पर दी जाती हैं। इनमें एंटीबायटिक, विटामिन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाइयां हैं। इस मुश्किल समय में इन दवाओं की खपत इतनी बढ़ गई कि जितनी दवाएं साल भर में प्रयोग होती थीं, उतनी केवल दो माह में कोरोना संक्रमितों को दे गईं।
एक तरफ जहां लोगों ने मेडिकल स्टोरों से पैरासिटामोल की 50 लाख से अधिक टैबलेट को खरीदा। वहीं शासन से उपलब्ध कराई मेडिकल किट के जरिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आठ लाख पैरासिटामोल की टैबलेट संक्रमितों में बांटी गईं। इसके साथ ही संक्रमण में प्रयुक्त होने वाली अन्य दवाओं का भी वितरण किया गया है।
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मेडिकल किट बनी लोगों की जीवनरक्षक
स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमित व उसके संपर्क में आने वाले व्यक्तियों को मेडिकल किट दी जा रही है। प्रत्येक पैकेट में बुखार के लिए पैरासिटामोल की 15, एंटीबायटिक की पांच, एंटी वायरस की तीन, विटामिन की 10, जिंक की 10 व विटामिन डी थ्री की दो गोली दी जाती हैं। जनपद में बृहस्पतिवार तक कुल 54000 मेडिकल किट का वितरण किया जा चुका है।
कालाबाजारी के कारण बढ़े कई दवाओं के दाम
आजमगढ़। लोगों द्वारा किए जा रहे दवाओं के स्टोरेज और कालाबाजारी के कारण कई प्रकार की दवाओं की बाजार में कमी पड़ गई। हालात यह थे कि जो साधारण सी दवा का आठ से दस रुपये में मिलने वाला पत्ता 50 से 60 रुपये तक बिका। रेमडेसिविर इंजेक्शन के सरकारी नियंत्रण में पहुंचने से पहले यह हालत हुई कि जिसके पास इंजेक्शन था, उसने जिससे जितना मिला उससे उतना वसूला।
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मेडिकल एंड रिप्रजेेंटेटिव एसोसिएशन के जिला महामंत्री रंजन राय ने बताया कि विगत दो माह में जिले में 50 लाख से अधिक पैरासिटामोल, पांच लाख से अधिक एजिथ्रोमाइसिन, 20 लाख के करीब आइवर मेक्टिन, 22 लाख लिम्सी, 21 लाख के करीब जिंकोविट, 30 हजार फेवी फ्लू, और 10 लाख डाक्सीसाइक्लिन की बिक्री हुई है। इसके अलावा जेनेरिक दवाओं की भी खूब बिक्री हुई। इन दवाओं की जितनी बिक्री एक साल में होती थी उतनी बिक्री विगत दो महीनों में हुई है।
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कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद कोरोना दवाओं की खपत कई गुना बढ़ गई थी। मांग पर सभी दवाइयां मुख्यालय से लगातार उपलब्ध हो रही थीं जिससे अस्पताल में दवा की कोई कमी नहीं हुई। अब स्थिति नियंत्रण में है और हमारे पास दवाओं की कमी न पहले थी और ना ही अब है।-डा. एके मिश्रा, सीएमओ
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