कपूरा शाह दीवान का बाग में मंगलवार को पसमांदा अधिकार सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें पसमांदा समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और शिक्षा, रोजगार व आरक्षण का लाभ दिलाने की आवाज उठाई गई।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष नूरुल हूदा ने कहा कि प्रदेश में बुनकर, धुनकर, दर्जी, राइन, कुरैशी, सैफी, पमरिया समेत कई मुस्लिम जातियों के पुश्तैनी रोजगार और कुटीर उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी का अधिकार छीनने के लिए नहीं, बल्कि वंचित समाज के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देने के लिए है। हर बच्चे को शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस-आईपीएस अधिकारी बनने का समान अवसर मिलना चाहिए।
मौलाना रेहान ने कहा कि पसमांदा समाज आज भी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा है। वक्ताओं ने सच्चर कमेटी, रंगनाथ मिश्र आयोग और मंडल आयोग की सिफारिशों का हवाला देते हुए पसमांदा समाज के लिए आरक्षण और अधिकारों की मांग उठाई।
सम्मेलन में उस्मान हलालखोर, इस्राइल मंसूरी, धर्मेंद्र निषाद, मंसूर कुजड़ा, सलीम नट, इसहाक अंसारी, नूर हसन पमरिया, अरविंद मूर्ति, अल्लाउद्दीन शाह और कुर्बान बंजारा ने विचार रखे। अध्यक्षता हाशिम पसमांदा ने और संचालन मौलाना रेहान ने किया।