1857 में अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले राजा कुंवर सिंह की याद में बनाए गए कुंवर सिंह उद्यान की हालत खराब है। इसका उपयोग विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा मीटिंग, धरना और जनसभा के लिए किया जाता है।
ब्रिटिश शासन काल में कुंवर सिंह उद्यान कंपनी बाग कहलाता था। यहां पर ब्रिटिश सरकार द्वारा खजाना रखा जाता था। जिसकी सुरक्षा के लिए सिपाही तैनात किए जाते थे। 1857 की क्रांति में कुंवर सिंह के नेतृत्व में देशी फौज ने ब्रिटिश सैनिकों के साथ इसी उद्यान में युद्ध कर आजमगढ़ की आजादी का झंडा बुलंद किया था।
उनकी याद में इस उद्यान का नाम कुंवर सिंह उद्यान रखा गया। लेकिन आज देखरेख और लापरवाही के चलते यह उद्यान अपने हाल पर आंसू बहा रहा है। राजनीतिक पार्टियों का सभा स्थल बनकर रह गया है। राजा कुंवर सिह की प्रतिमा को गेट पर लगाने का प्रस्ताव बहुत पहले ही पास हुआ लेकिन आज तक प्रतिमा नहीं लग सकी।
नगरपालिका प्रशासन ने महीनों पूर्व उद्यान में फौव्वारा आदि लगाकर सुंदर बनाने की बात कही गई थी। लेकिन सिर्फ बाउंड्रीवाल और योगाहट को बनाकर छोड़ दिया।