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हिंदी को राजकीय भाषा का दर्जा दिलाने में पंत जी का था महत्वपूर्ण योगदान: डीएम

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कलेक्ट्रेट भवन में गोविंद बल्लभ पंत के जयंती कार्यक्रम में शामिल कर्मचारी। - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को आजादी के अमृत महोत्सव एवं चौरीचौरा शताब्दी समारोह की शृंखला में भारतरत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महान देशभक्त, कुशल प्रशासक, सफल वक्ता एवं उदारमान पंत जी को श्रद्धांजलि दी। हिंदी को राजकीय भाषा का दर्जा दिलाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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जिलाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित खूंट गांव में हुआ था। काकोरी कांड के मुकदमे ने उनको वकील के रुप में प्रतिष्ठा दिलाई। वर्ष 1937 में पंत जी संयुक्त प्रांत के प्रथम प्रधानमंत्री बने एवं 1946 में उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने और 10 जनवरी 1955 को पंत जी ने भारत के गृहमंत्री का पद संभाला। सन 1957 में गणंतत्र दिवस पर भारत की सर्वोच्च उपाधि भारतरत्न से उनको विभूषित किया गया। सात मार्च 1961 को पं. गोविंद बल्लभ पंत जी का निधन हो गया। डीएम ने कहा कि पंत जी का स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे महान देशभक्त, कुशल प्रशासक, सफल वक्ता, तर्क के धनी तथा लेखनी से सशक्त थे। इसी क्रम में विकास भवन, जिला सूचना कार्यालय, जिला प्रोबेशन कार्यालय, जिला समाज कल्याण, उद्योग कार्यालय, मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सहित तहसीलों एवं ब्लाकों में जयंती पर श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर मुख्य राजस्व अधिकारी हरि शंकर, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आजाद भगत सिंह आदि उपस्थित रहे। ठेकमा: गोविंद बल्लभ पंत की जयंती ठेकमा ब्लॉक के सभागार में मनाई गई। इस मौके पर बीडीओ आजम अली, वशिष्ठ मुनि राय, आनंद, मिथिलेश राय, देवेश कुमार मिश्र, विवेकानंद, रमेश राम, राममिलन राम, परमानंद पांडे आदि मौजूद रहे।
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