लाटघाट। लाक डाउन के बाद श्रमिक भूखों मरने अच्छा घर जाना समझे। कुछ पैदल चले तो कुछ ट्रेन और बस के जरिए अपने घर को रवाना हुए। वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जो निर्धारित भाड़े से पांच गुना तक अधिक भाड़ा पर निजी गाड़ी करके घर को रवाना हुए लेकिन गाड़ी चालक ने उन्हें बीच में ही छोड़ दिया। जिसका परिणाम हुआ कि लोग पैदल ही गंतव्य तक रवाना हुए। इस दौरान जब बाहर से आने वालों से बात की गई तो उनकी आपबीती सुन वहां मौजूद लोगों की आंखें डबडबा आई। बहुत से लोग ऐसे भी मिले जिनके पास खाने पीने के पैसे नहीं थे। घर के सामान को औने पौने दाम पर बेचकर उन्होंने घर जाने का इंतजाम किया। गांव पहुंचे तो सुकून मिला हालांकि उन्हें 14 दिन तक घर परिवार से दूर रखा गया है लेकिन उन्हें इस बात का संतोष है कि घर पहुंच गए हैं तो अब उन्हें भूखों मरने की नौबत नहीं आएगी।
मैजिक के सहारे चार दिन में पहुंचे घर
लाटघाट। सगड़ी के महुला गांव निवासी जयराम पटेल ने बताया कि वह सूरत में पावरलूम चलाने का कार्य करते थे। लाक डाउन के बाद 23 मार्च से काम बंद हो गया जो आज तक नहीं मिला। जब खाने पीने की दिक्कत होने लगी तो घर आने का रास्ता तलाशने लगे। फिर वहां 21 और 22 की संख्या में हम लोगों ने मिलकर मैजिक किया। जिसमें बैठने की भी जगह नहीं थी। जिसे प्रति व्यक्ति 3500 रुपये लिए और चार दिन में यहां तक पहुंचाया।
तीन हजार भाड़ा देने के बाद भी चलना पड़ा पैदल
लाटघाट। रौनापार थाना के बेलकुंडा बाजार गांव निवासी अरविंद ने बताया कि वह महाराष्ट्र में बैग की सिलाई का काम करते थे। काम बंद हो जाने पर पैसा जब खत्म हुआ। इधर उधर से कुछ पैसों की व्यवस्था किया और पैदल ही चल पड़ा। कहीं अगर ट्रक मिल गई तो उस पर बैठ गया। इस प्रकार कभी पैदल तो कभी ट्रक, ट्रैक्टर आदि के सहारे पांचवें दिन घर पड़ा। इस दौरान रास्ते में हमारा लगभग 3000 रुपये भाड़ा खत्म हुआ।
भाड़ा दिया, पैदल चले और भूखे भी पड़ा रहना
लाटघाट। रौनापार थाना क्षेत्र के बेलकुंडा गांव निवासी गोविंद गोंड़ बैंगलोर में रहकर कार्य करते है। जब लाक डाउन बढ़ता गया तो इनके सामने पैसे की समस्या खड़ी हो गई। इसके बाद यह पैदल ही घर के लिए निकले। रास्ते में कुछ गाड़ियों को पकड़े। भूखे भी रहे और अंतत: घर पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस प्रकार गाड़ियां पकड़ने में उनका लगभग 3500 रुपये भाड़ा खर्च हो गया। लेकिन घर आकर इस बात संतोष हुआ कि अब उन्हें परेशानी नहीं होगी।
मकान का एक महीने भाड़ा बाकी, बंद कर आए ताला
लाटघाट। रौनापार थाना क्षेत्र के बेलकुंडा गांव निवासी रणजीत ने बताया कि वह गुड़गांव हरियाणा की एक छोटी सी कंपनी में काम करते थे। लाक डाउन के बाद काम बंद हो गया। खाने पीने की समस्या खड़ी हो गई। मकान मालिक द्वारा मकान भाड़ा मांगा जा रहा था। हमारे पास पैसा था नहीं इसलिए घर जाने का निर्णय लिया। अपने साथ काम करने वालों से कुछ पैसे उधार लिए और भाड़ा दिए बगैर मकान में ताला बंद कर घर चले आए।