रैकेट ने जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण कार्यालय, जिला समाज कल्याण कार्यालय, अपर जिला विकास अधिकारी कार्यालय (समाज कल्याण),
जिला विकलांग कल्याण अधिकारी कार्यालय और जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के यहां से विभिन्न योजनाओं के लिए जारी धनराशि का भुगतान फर्जी मेमो के जरिए किसी व्यक्ति विशेष के खाते में करा लिया।
जांच में पाया गया कि गोविंद नामक व्यक्ति के खाते में विभिन्न योजनाओं के 11,82,961 रुपये तथा उसकी पत्नी अनीता के खाते में भी 6,40,500 रुपये डालकर दूसरे दिन ही आहरण कर लिया गया।
यह एक मामला है। इसी तरह, 93 फर्जी मेमो के जरिए 1.44 करोड़ रुपये का घपला किया गया है।
बता दें कि जिला समाज कल्याण समेत अन्य विभागों में हुए अरबों रुपये के घोटाले के अमर उजाला के खुलासे को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी रणवीर प्रसाद ने जांच का आदेश जारी किया था।
इसके लिए गठित टीम ने दो माह में तीन मामलों को उजागर किया। साथ ही विभिन्न थाने में तीन रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई। इस बीच, उनका तबादला होने से जांच प्रक्रिया प्रभावित भी हुई लेकिन नवागत डीएम सुहास एलवाई ने जानकारी होने पर जांच को जारी रखने का आदेश दिया था।
इस क्रम में टीम को चौथी सफलता हाल ही में मिली है। पता चला कि रैकेट ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए जारी धन लाभार्थियों को देने के बजाय कुछ व्यक्तियों के खाते में विभागों के नाम से फर्जी मेमो तैयार करके डाल दिया।
यह राशि विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन, वृद्धा पेंशन और छात्रवृत्ति आदि का है। जांच में सामने आया कि जिला सहकारी बैंक की कप्तानगंज शाखा में गोविंद नाम के एक व्यक्ति के खाते में इन योजनाओं की राशि विभिन्न मेमों के जरिए डाली गई।
गोविंदा और अनीता के खाते में एक-एक दिन में एकमुश्त 56316 रुपये के आसपास की धनराशि भेजी गई हैं। गोलमाल में ऐसे न जाने कितने खाताधारक शामिल हैं। अब डीएम के आदेश के बाद ही इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।