आजमगढ़। बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में टेल्हुआ चकवली गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने चकबंदी विभाग और भू-माफियाओं की मिलीभगत के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर फर्जी प्रस्ताव पर हुए चकबंदी आदेश की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के केदार यादव ने चकबंदी के लिए फर्जी प्रार्थना पत्र देकर, बिना ग्रामीणों की सहमति या बैठक के एकतरफा आख्या तैयार कराई। इससे धारा चार का प्रकाशन हो गया, जबकि ग्रामीण धारा 6 की मांग कर रहे हैं।
पहले भी प्रदर्शन के बाद चकबंदी अधिकारियों ने आश्वासन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी झूठे वादों के साथ उन्हें भटकाते रहे और अब जबरन सर्वे का दबाव बना रहे हैं। टेल्हुआ में 1992 में चकबंदी हो चुकी थी। 2018 में शासन ने धारा 6(2) की विज्ञप्ति जारी कर गांव को चकबंदी प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। इसके बावजूद भू-माफियाओं ने अधिकारियों से साठगांठ कर फर्जी प्रस्ताव बनवाया। ग्रामीणों ने पूर्व में भी प्रदर्शन किया, लेकिन सहायक चकबंदी अधिकारी संजय दुबे ने मनमानी आख्या भेजकर मामले को उलझाए रखा।
ग्रामीणों की शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी, लेकिन उन्हें आशंका है कि भू-माफियाओं के दबाव में मामला दब न जाए।