पंचायत चुनाव के बाद कोरोना ने गांव की राह पकड़ ली है। प्रशासन की ओर से गांवों में संक्रमण को रोकने के लिए हर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अभी भी लोग जांच कराने से कतरा रहे हैं।
बुखार और खांसी आने पर लोग उसे वायरल और काली खांसी का नाम देकर झोला छाप चिकित्सकों से उपचार तो करा रहे हैं जिसके चलते समस्या बढ़ रही है।
ज्यादातर लोग कोरोना जांच कराने से परहेज कर रहे हैं। जनपद में पंचायत चुनाव के दौरान काफी संख्या में लोग मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों से घर आए हैं। इनके द्वारा पंचायत चुनाव में अपने प्रत्याशी के समर्थन में जहां प्रचार-प्रसार किया वहीं मतदान और मतगणना के दिन अभिकर्ता भी बना गए।
जिसका परिणाम है कि कोरोना ने अब शहर को छोड़कर गांवों का रूख किया है। शायद ही गांव का कोई एस घर हो जिसमें सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज न हों। लेकिन लोग जांच कराने की बजाए इसे वायरल मानकर झोला छाप चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं।