विद्युत बिलों में संशोधन के नाम पर जिले में हुए भारी भरकम घोटालों की तपिश के बीच बिजली विभाग ने ऐसे 1500 उपभोक्ताओं को 25 करोड़ से अधिक बकाया का बिल भेज दिया है, जिन्हें बिलों में संशोधन के जरिए राहत मिली थी। विभाग ने बिल जारी करने के साथ चेतावनी देते हुए उन्हें जल्द से जल्द धनराशि जमा कराने को कहा है। विभाग की इस कार्रवाई से उपभोक्ताओं में हड़कंप है।
प्रदेश में बिजली बिलों में छूट के नाम पर गोलमाल करने में आजमगढ़ भी पीछे नहीं रहा। यहां जांच करने आई एसटीएफ को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। फर्जी आईडी के जरिये भारी भरकम बिलों को कम करने की बात पकड़ में आई है। इनमें कुछ अधिकारियों और कुछ निजी कंपनियों के लोगों की संलिप्तता का भी खुलासा हुआ है। अब एसटीएफ अधिकारियों के उन पासवर्ड को खंगाल रही हैजिनके जरिये भारी भरकम बिलों के बैलेंस को जीरो दिखाया गया है। दूसरी ओर अपने बचाव में बिजली विभाग ने करीब 1500 उपभोक्ताओं को चिह्नित कर 25 करोड़ से अधिक बकाये का बिल भेज दिया है। इससे उपभोक्ताओं के बिल जमा न कराने पर न सिर्फ कनेक्शन काट दिए जाएंगे बल्कि पुलिस केस तक की नौबत आ सकती है।
सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ की टीम छह मई को जिले में आई थी। सिधारी हाइडिल में चार दिन तक चली जांच में घोटाले के कई मामले उजागर हुए। पहले चरण की जांच में पता चला है कि फर्जी आईडी के जरिये चार पांच लोगों की कलम बिलों की हेराफेरी के लिए खूब चली है। इन लोगों ने भारी भरकम बकाये को जीरो दिखा दिया है। सूत्र बताते हैं कि बिचौलियों के माध्यम से बिल माफी का सौदा आधे-आधे पर होता था।
बाद में फर्जी आईडी से उपभोक्ता के खाते का बैलेंस तो जीरो कर दिया जाता था मगर रिकार्ड में उसे बकायेदार ही रखा जाता था। इस गोलमाल में प्राइवेट कंपनी के मीटर रीडरों की भी भूमिका भी संदिग्ध मिली है। इस बारे में विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता ओपी राम ने कहा कि जिले में किसी भी उपभोक्ता का बिल माफ नहीं किया गया है। उपभोक्ता किसी गलतफहमी के शिकार थे। जब बिल माफ ही नहीं हुआ तो बकाया जमा कराया ही जाएगा। कहा कि 1500 उपभोक्ताओं को बकाये का बिल भेजा जा रहा है। फर्जी आईडी के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता हूं।