आरबीआई की तरफ से सभी बैंकों को मिलने वाली रकम बीते चार दिनों से न मिलने की वजह से जिले के सभी बैंक और एटीएम बंद पड़े हैं। जबकि रुपये लेने के चक्कर में ग्राहक सुबह से ही बैंक और एटीएम के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो जा रहे। कैश न होने की वजह से बैंक के अधिकारी और कर्मचारी नियमित जमा होने वाले रुपयों के जरिए जरूरतमंद लोगों की आवश्यकता को पूरी कर रहे। अधिकारियों का मानना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में इसको लेकर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
जिले में यूबीआई, एसबीआई, इलाहाबाद, ग्रामीण बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ महाराष्ट्रा, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक, इंडियन ओवरसीज, केजीएसजीबी, सिंडिकेट बैंक, यूको, विजया, पंजाब एंड सिंध, आईसीआईसीआई, कारपोरेशन बैंक आदि 23 प्रमुख बैंकों के 301 शाखाएं हैं। इन बैंकों के 252 एटीएम खोले गए हैं। शहर से लेकर गांव देहात में फैले इन्हीं बैंक और एटीएम के जरिए लोग खातों से रुपये निकालकर अपनी आवश्यकता पूरी करते हैं। नोटबंदी के फैसले के 27वें दिन सोमवार को भी कैश के लिए मारामारी रही।
पहले तो रिजर्व बैंक अपने अधिनस्थ बैंकों को थोड़ा बहुत कैश भेज रहा था लेकिन दो दिसंबर से बैंक को कैश नहीं भेजा गया। लगन के समय बैंकों से कैश नदारद रहने से हर कोई परेशान है। जरूरतमंद लोग भोर से ही रुपये पाने के लालच में बैंक और एटीएम के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो जा रहे। घंटों प्रयास के बाद भी उन्हें रुपया नहीं मिल रहा। चार दिनों से लगातार रुपये न मिलने की वजह से सोमवार को भी बैंकों के बाहर लंबी लाइन लगी रही। बैंक में जमा होने वाले मामूली कैश से अधिकारी जरूरतमंद लोगों को थोड़ा बहुत भुगतान कर रहे।