बटला एनकाउंटर के सात वर्ष हो गए। हर साल इस घटना की न्यायिक जांच की मांग केंद्र सरकार से की जाती है लेकिन सरकार जांच से पीछे हट जा रही है। उसे डर है कि जांच हुई तो हकीकत सामने आ जाएगी। केंद्र सरकार मामले की जांच नहीं करा रही तो बेगुनाहों को ही रिहा कर दें।
उक्त बातें एसोसिएशन फार वेलफेयर मेडिकल एजुकेशन एंड लिगल असिस्टेंस के अध्यक्ष डा. जावेद अख्तर ने शनिवार को मुहल्ला बाजबहादुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से कहीं। उन्होंने कहा बटला हाउस कांड के बाद से ही बेगुनाह मुसलमान लड़कों को उठाने का सिलसिला शुरू हुआ, ताकि इस कौम को बदनाम करने के साथ उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे युवकों को प्रभावित किया जा सके। कहा कि मेमन के मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा फैसला कराकर फांसी पर लटका दिया गया, लेकिन मुंबई कांड, मालेगांव, मक्का मस्जिद और गोधराकांड के आरोपियों के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई? संस्था का प्रतिनिधिमंडल डीएम से मिलकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। डा. वाहिद अली, डा.अमीर आलम आदि मौजूद रहे।